फिर दूरी क्यों आई, आप 'हनुमान' भी कह रहे थे, लेकिन दूर क्यों थे?
चिराग: दूरी और करीबी, दोनों के लिए जिम्मेदार एक व्यक्ति हैं और वो हैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी। दूरियां भी उनकी वजह से आईं। 2017 से दूरियों की शुरुआत हो गई थी। मैं या मेरे पिता रामविलास पासवान जी नीतीश कुमार के साथ काम करने को लेकर सहज नहीं थे। जब नीतीश भाजपा के साथ थे तो हमने कभी पहल भी नहीं की उनके साथ आने की। 2002 में जब हम एनडीए से यूपीए में गए, तब नीतीश कुमार बिहार में मुख्यमंत्री रहे। तब हम उनके साथ नहीं थे। नीतीश कुमार हमारी पार्टी के खिलाफ थे। 2005 में पार्टी के 29 विधायक तोड़े। दलित-महादलित कर मेरे पिता के राजनीतिक कद को घटाने की कोशिश की। कभी हमारे बीच सहजता नहीं थी।
2013 में जब नीतीश कुमार अलग हुए, तब हम एनडीए में आए। जब नीतीश दोबारा आए तो हम सहज नहीं थे, लेकिन अमित शाह जी और प्रधानमंत्री जी के कहने पर हम गठबंधन में रहे। 2019 के चुनाव में नीतीश कुमार ने आदतन धोखा देते हुए हमारे प्रत्याशियों को हराने का काम किया। 2020 में इसीलिए हम सरकार से अलग होने का फैसला कर चुके थे। हमारी बातें विजन डॉक्यूमेंट में नहीं आ रही थीं। बिहार के युवाओं, नीतियों की बात थी, लेकिन मुख्यमंत्री जी ने उस बात को स्वीकारा नहीं। हमारा विरोध भाजपा से नहीं था, इसलिए 2020 के विधानसभा चुनाव में हमने 137 उम्मीदवार में से अधिकतर जनता दल यूनाइटेड के खिलाफ उतारे। नीतीश कुमार के दोबारा जाने के बाद हमने बात शुरू की और हम फिर गठबंधन में हैं।
चाचा से मिलते वक्त आपने पैर छुए, गले लगे तो अब क्या परिवार एक होने वाला है, दूरी खत्म होने वाली है?
चिराग: ये राजनीतिक नहीं, पारिवारिक मसला है और हमारे यहां परिवार के बड़े ही परिवार के मामलों में फैसला करते हैं। मेरे पिता के बाद मैंने अपने चाचा में ही अपने पिता की छवि को देखा था। शायद मुझसे कोई गलती हुई होगी, जिसके कारण वो अलग हुए। मुझे नहीं समझ आया। अलग होने का फैसला भी उनका था। साथ आने का फैसला भी वही करेंगे, लेकिन शायद वो फैसला कर चुके हैं। तभी वो कह रहे हैं कि सूरज पश्चिम से उग जाएगा, लेकिन चिराग से मेरा कोई समझौता नहीं होगा।
एनडीए में रहते हुए हाजीपुर की सीट पर किसका दावा होगा? आपका या आपके चाचा का?
चिराग: मेरे पिता के आधे काम पूरा करना मेरी जिम्मेदारी है। हाजीपुर को वे अपनी मां मानते थे और उसे मैं छोड़ नहीं सकता। हमारी पार्टी वहां से चुनाव लड़ेगी। गठबंधन को लेकर उनसे बात हुई है।
फिर जमुई का क्या होगा, आप उसे भी अपना परिवार कहते थे?
चिराग: हाजीपुर से पार्टी चुनाव लड़ेगी। जमुई मेरी कर्मभूमि है। 10 साल से मुझे वहां से सम्मान मिला है। पार्टी का संसदीय दल हाजीपुर और जमुई से चुनाव लड़ने पर फैसला लेगा, लेकिन इतना तय है कि हमारी पार्टी ही इन दोनों से जगहों से चुनाव लड़ेगी।
क्या चिराग पासवान केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा होने वाले हैं?
चिराग: ये प्रधानमंत्री जी का अधिकार क्षेत्र है। इस लालसा में हमने गठबंधन नहीं किया है। इस पर कुछ भी कहना गलत होगा। गठबंधन करने से पहले हमारी कुछ चिंतांए थीं और उन मुद्दों पर आम सहमति बनने के बाद ही हमने उसकी घोषणा की।
क्या चिताएं थीं। आम सहमति में लोकसभा, विधानसभा सीटों का बंटवारा भी शामिल है?
चिराग: गठबंधन में हुई चर्चा को समय से पहले करना गलत होगा। जो बंद कमरे में हुआ, वो वक्त के साथ सामने आएगा। मेरा गठबंधन भाजपा के साथ है, लेकिन उनका कई और पार्टियों के साथ है। समय आने पर सभी पार्टियां साथ बैठकर उस पर कोई फैसला करेंगी।
तेजस्वी से आपकी मुलाकात होती रहती है, उनके लिए आपके क्या विचार हैं?
चिराग: मैं व्यक्तिगत रिश्तों को निभाने वाला व्यक्ति हूं। राजनीतिक और व्यक्तिगत सीमाओं को मैं अलग कर सकता हूं। कई मुलाकातें व्यक्तिगत कारणों से होती है। लालू जी के यहां इफ्तार में मैं सिर्फ गठबंधन से दूर होने के कारण नहीं गया। मेरे पिता और लालू जी ने साथ में काम किया है। तेजस्वी मेरे छोटे भाई के जैसे हैं। उनके सारे बच्चे भाई-बहन हैं। मैं अपने पारिवारिक रिश्तों को निभाते रहूंगा। मुख्यमंत्री जी के खिलाफ होते हुए भी मैं अपने व्यक्तिगत संबंध निभाता हूं। उनसे मिलते वक्त उनके पैर छूता हूं। चाचा जैसे ही मिले, मैंने उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया। मेरे पीएम के साथ संबंध भी व्यक्तिगत संबंध हैं, उन्हें राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
आपके पिता की बिहार में काम करने की इच्छा थी। कई युवा आपको मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं, आपकी क्या इच्छा है?
चिराग: जो मुझमें इतना बड़ा नेतृत्व की क्षमता देख रहे हैं विनम्रता के साथ उन्हें धन्यवाद। फिलहाल मैं मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में नहीं हूं। बिहारी हूं, बिहार के लिए काम करना चाहता हूं। विकसित बिहार बनने के लिए जमीन पर काम करना जरूरी है। बड़ी-बड़ी कंपनियों, अधिकारियों को देखिए, वो बिहार से हैं। फिर मेरी धरती, मेरा बिहार क्यों पीछे छूट गया? मेरे मन में पद की लालसा नहीं है, लेकिन बिहार को आगे बढ़ाने के लिए वहां वक्त देता हूं। आने वाले समय में ऐसी कोई जिम्मेदारी मिली तो भागूंगा नहीं, उसे निभाऊंगा जरूर।
विधानसभा या लोकसभा, आपके लिए क्या ज्यादा जरूरी है?
चिराग: बिहार विधानसभा हमारे लिए ज्यादा जरूरी है। हम वहां खुद को सक्रिय रखना चाहेंगे, लेकिन बिहार की आवाज को उठाने के लिए लोकसभा भी जरूरी हो जाती है, लेकिन प्राथमिकता की बात हो तो मेरे लिए बिहार ही पहले है।