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नहीं चली चीन की चालबाजी, रॉड-भाले और बंदूक के साथ आए चीनी सैनिकों को खदेड़ा

Wed, 09 Sep 2020 03:09 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत चीन सीमा: सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) जारी तनातनी के बीच पैंगोंग झील के दक्षिणी छोर के पास अहम चोटियों पर भारतीय सेना के नियंत्रण से बौखलाई चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने सोमवार शाम रेजांग ला के पास घुसपैठ की कोशिश की, जिसे भारतीय जवानों ने नाकाम कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, रेजांग ला के उत्तर में स्थित मुखपरी चोटी और रेकिन ला के पास 50-60 चीनी सैनिक बरछे, भाले और धारदार हथियारों से लैस होकर पूरी तैयारी के साथ गलवां घाटी जैसे धोखे को अंजाम देने की फिराक में आए थे।

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रणनीतिक रूप से अहम इन चोटियों पर कब्जाने की मंशा से आए पीएलए के सैनिकों ने 10-15 राउंड हवाई फायरिंग भी की। हालांकि, इसके बाद भी भारतीय सेना ने संयम बरतते हुए बिना गोलीबारी किए ही चीनी सैनिकों को खदेड़ दिया। 15 जून को गलवां घाटी में चीन ने पत्थरों, कील जड़े हुए डंडों और रॉड से हमला कर दिया था, जिसमें हमारे 20 जवान शहीद हो गए थे।




सूत्रों के मुताबिक, इस घटना के बाद से ही पैंगोंग झील के पास स्थित चुशुल के रेजांग ला में दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने की स्थिति में आ गई हैं। इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आवास पर कैबिनेट की बैठक बुलाई तो सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को एलएसी पर हालात की जानकारी दी। वहीं, भारतीय सेना ने मंगलवार को चीन की इस करतूत की पोल खोलते हुए कहा कि भारत एलएसी पर तनाव और किसी भी तरह के संघर्ष की स्थिति को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। चीन तनाव को बढ़ाने के लिए निरंतर उकसावे की गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। भारतीय सेना ने न तो एलएसी पार की और न ही गोलीबारी जैसी कोई आक्रामक कार्रवाई की। सेना ने कहा, सैन्य, कूटनीतिक और राजनीतिक स्तर पर जारी बातचीत के बावजूद पीएलए सरेआम समझौते के उल्लंघन के साथ-साथ लगातार आक्रामक हरकत भी कर रही है।
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सात सितंबर को ऐसी ही एक घटना में पीएलए के सैनिकों ने एलएसी से सटी हमारी एक अग्रिम चौकी की ओर बढ़ने की कोशिश की। जब हमारे सैनिकों ने इसे विफल कर दिया तो पीएलए के सैनिकों ने हवा में कुछ राउंड गोलीबारी भी की। हालांकि, उकसावे की इस गंभीर हरकत के बावजूद हमारे सैनिकों ने संयम बरतते हुए जिम्मेदार और गंभीर तरीके से बर्ताव किया। चीन ने यह हरकत ऐसे समय में की है, जब मॉस्को में 10 सितंबर को विदेश मंत्री जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी मिलने वाले हैं। इससे पहले चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स के हवाले से चीनी सेना के वेस्टर्न थियेटर कमांड ने आरोप लगाते हुए कहा था कि भारतीय सैनिकों ने पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर एलएसी पार की और जब चीनी सेना भारतीय जवानों से बातचीत करने के लिए आगे बढ़ी तो उन्होंने जवाब में हवा में गोली चलाई।

संप्रभुता और सरहदों की रक्षा की कीमत पर शांति नहीं: सेना
बयान के मुताबिक, भारतीय सेना शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, मगर वह हर हाल में अपनी राष्ट्रीय अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए भी वचनबद्ध है। चीन के वेस्टर्न थियेटर कमांड ने झूठे बयान के जरिये अपने देश और बाकी दुनिया के लोगों को गुमराह करने की कोशिश की है।

चीन की पोल खुली तो भारतीय सैनिकों पर ही सीमा पार करने का मढ़ा आरोप
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने अपनी दैनिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, भारतीय सैनिक अवैध रूप से एलएसी के दूसरी ओर आ गए थे, जिसके बाद चीनी सीमा की निगरानी करने वाले सैनिक उनसे बातचीत करने के लिए गए, मगर तभी भारतीय सैनिकों ने चेतावनी देने के लिए गोलियां चलानी शुरू कर दीं। प्रवक्ता ने कहा कि 1975 के बाद यह पहला मौका है, जब सीमा पर गोलीबारी हुई है। चीनी प्रवक्ता ने कहा कि चीन ने कूटनीतिक और सैन्य पहल के जरिये भारत से संपर्क किया है। मतभेदों को शांतिपूर्वक बातचीत से दूर किया जाना चाहिए।

विदेश मंत्रालय ने कहा, डोभाल को लेकर की गई टिप्पणी पूरी तरह झूठी
विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, हमने ग्लोबल टाइम्स और चाइना डेली में चल रही रिपोर्ट देखी। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल को लेकर भी कुछ टिप्पणी की गई है। ये रिपोर्ट पूरी तरह से फर्जी और झूठी हैं। इनका कोई आधार नहीं है। हम मीडिया से ऐसी रिपोर्टिंग से परहेज करने का आग्रह करते हैं। दरअसल, चीनी मीडिया ने अपनी कुछ रिपोर्ट में दावा किया था कि डोभाल की ओर से ही माहौल को गरमाने की कोशिश की जा रही है।

चीन की बौखलाहट की अहम वजहें
-पैंगोंग झील के दक्षिणी छोर पर ब्लैक टॉप और हेलमेट टॉप पर भारतीय सेना की मजबूत स्थिति के बाद चीन की पोस्ट भारतीय फायरिंग रेंज में हैं।
-भारतीय सैनिक ऊंचाई पर हैं, जबकि चीन की पोस्ट नीचे। इससे चीन की पीएलए की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी।
-इन चोटियों पर नियंत्रण से भारतीय इलाकों में चीन के घुसपैठ के रास्ते बंद हो गए हैं। यहां अब भारतीय सेना का दबदबा है।

मेजर शैतान सिंह की अगुवाई में 120 जवानों ने चीन के 1300 सैनिकों को मार गिराया था
रेजांग ला एलएसी के पास एक पहाड़ी दर्रा है, जो लद्दाख में स्थित है। 16,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित रेजांग ला से चीन पर नजर रखना आसान हो जाता है। चीन के लिए लेह में घुसने का यहीं से रास्ता है और यहीं से वह दौलत बेग ओल्डी तक पहुंच सकता है। यही वजह है कि चीन बार-बार इस इलाके को कब्जाना चाहता है। पहली बार सन 1962 की जंग सबकी नजरों में उस समय आई थी, जब मेजर शैतान सिंह की अगुवाई में 13 कुमाऊं बटालियन के 120 जवानों ने चीन के 1300 जवानों को मार गिराया था। इस जंग को रेजांग ला के युद्ध के नाम से जाना गया। 1962 की जंग में इस जगह पर अगर सेना जीत नहीं हासिल करती तो फिर शायद पूरे लद्दाख पर चीन का कब्जा होता। मेजर शैतान सिंह को मरणोपरांत परमवीर चक्र दिया गया था।

सीमा विवाद में बिना बुलाए नहीं करेंगे मध्यस्थता: रूस
रूस ने कहा है कि वह भारत और चीन के बीच सीमा विवाद में दखल नहीं देगा। रूस ने साफ किया कि ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन जैसे संगठनों में द्विपक्षीय मुद्दों को केवल आम सहमति से ही लाया जाएगा। भारत में रूस के उपराजदूत रोमन बाबुश्किन ने कहा, हम भारत और चीन में बातचीत के पक्षधर हैं। हम तब तक दखल नहीं देंगे, जब तक कि दोनों ही पक्ष हमें आमंत्रित नहीं करते हैं। हम दोनों ही देशों के बीच जारी किसी भी वार्ता में हिस्सा नहीं ले रहे हैं।

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