महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे ने बताया कि दावोस में महाराष्ट्र सरकार ने 3.53 लाख करोड़ रुपये के एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे 1,02,000 करोड़ रुपये का निवेश समझौते हुआ है।
वरिष्ठ भारतीय अधिकारी ने संकेत दिए हैं कि अगर सीमा पर शांति रहती है, तो भारत चीनी निवेश पर लगे प्रतिबंधों में ढील दे सकता है। विश्व आर्थिक मंच के सत्र में शीर्ष औद्योगिक नीति विशेषज्ञ राजेश कुमार सिंह ने बताया कि सीमा पर तनाव भारत-चीन संबंधों के लिए सबसे बड़ी परेशानी है। 2020 में भारत ने अपनी सीमा वाले देशों में स्थित कंपनियों के निवेश पर जांच कड़ी कर दी। इसके बाद से ही चीन की कंपनियों पर भी भारत में निवेश पर प्रतिबंध है। प्रतिबंधों की वजह से दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर का निवेश बाधित हो गया। उद्योग-आंतरिक व्यापार विभाग के सचिव राजेश सिंह ने कहा, एक बार संबंध स्थिर हो जाएंगे, तो निवेश नियम बदल सकते हैं।
वैश्विक चुनौतियों से निपटने में सक्षम भारत
डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की सराहना
वैश्विक विशेषज्ञों के एक समूह ने भारत के मजबूत डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (डीपीआई) की तारीफ की है। खासतौर पर यूपीआई की सराहना करते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि इसकी वजह से विभिन्न क्षेत्रों में असमानता को कम करने में मदद मिली है। पैनल चर्चा में पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल समेत अन्य लोग शामिल हुए।
भारत मौके का लाभ उठा रहा: पुरी
महाराष्ट्र ने किया 3.53 लाख करोड़ का एमओयू
महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे ने बताया कि दावोस में महाराष्ट्र सरकार ने 3.53 लाख करोड़ रुपये के एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे 1,02,000 करोड़ रुपये का निवेश समझौते हुआ है।
भारत में गारंटी...व्यापार-निवेश के लिए आएं निवेशक : वैष्णव
केंद्रीय उद्योग मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि दुनिया को व्यापार-निवेश के लिए भारत के साथ आना चाहिए, क्योंकि यहां मोदी की गारंटी मिलती है। डब्ल्यूईएफ की वार्षिक बैठक से इतर वैष्णव ने कहा, पीएम ने भारत को दुनिया के लिए सबसे भरोसेमंद देश बना दिया है। वैश्विक व्यवसायों को भारत की अर्थव्यवस्था की स्थिरता और लचीलेपन का लाभ उठाने के लिए विचार करना चाहिए।
भारत वैश्विक उत्तर दक्षिण के बीच का पुल : ईरानी
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने ब्रिक्स के विस्तार पर चर्चा में कहा कि भारत वैश्विक उत्तर और दक्षिण के बीच पुल की तरह है। भारत एकमात्र देश है, जिस पर ब्रिक्स के सभी देश भरोसा कर सकते हैं। यह उनके लिए गर्व की बात है।