वेडॉन्ग ने कहा, भारत और चीन को मतभेदों के प्रबंधन से परे जाते हुए सकारात्मक ऊर्जा के संचय के माध्यम से द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और विकास के लिए अधिक से अधिक सहयोग करने की दिशा में काम करना चाहिए। चीनी राजदूत ने कहा कि दोनों देश एक-दूसरे के बड़े व्यवसायिक साझेदार हैं। इस साझेदारी को बढ़ाने में ही दोनों देशों का फायदा होगा। भारत-चीन संबंधों की वैश्विक व रणनीतिक अहमियत पर गौर करते हुए वेडॉन्ग ने कहा, दोनों पक्षों को रणनीतिक कम्युनिकेशन मजबूत करना चाहिए और आपसी राजनीतिक विश्वास को बढ़ाना चाहिए।
हुआवे के विवाद का भी जिक्र किया
चीनी राजदूत ने हुआवे कंपनी के विवाद का भी जिक्र किया और उम्मीद जताई कि नई दिल्ली, चीनी कंपनियों को अपने देश में पारदर्शी, दोस्ताना और आसान व्यापारिक माहौल उपलब्ध कराएगी। चीनी राजदूत की यह टिप्पणी अमेरिका की तरफ से सभी देशों से की जा रही उस अपील के दौरान आई है, जिसमें अमेरिका ने सभी देशों से दिग्गज चीनी टेलीकॉम कंपनी हुआवे को अपने 5जी मोबाइल नेटवर्क से दूर रखने के लिए कहा है। भारत में भी 5जी सेवाओं का मोबाइल नेटवर्क पर ट्रायल शुरू होने जा रहा है, लेकिन अभी तक इसमें हुआवे को अनुमति देने या नहीं देने का फैसला नहीं किया गया है।
32 गुना बढ़ा है दोनों देशों में कारोबार
चीनी राजदूत ने अपने देश को भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बताया और कहा कि भारत उनका दक्षिण एशिया में सबसे बड़ा व्यापारिक सहयोगी है। उन्होंने कहा, दोनों देशों के बीच 21वीं सदी शुरू होने से अब तक व्यापार करीब 32 गुना बढ़ोतरी के साथ तीन अरब डॉलर सालाना से 100 अरब डॉलर सालाना के करीब पहुंच गया है। उन्होंने कहा, 1000 से ज्यादा चीनी कंपनियों ने भारत में निवेश किया हुआ है, जो करीब आठ अरब डॉलर के बराबर है और इससे स्थानीय स्तर पर दो लाख नौकरियां सृजित हुई हैं। उन्होंने कहा, दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग बढ़ने की अभी बहुत संभावना बाकी है।