टेलिकॉम सेक्टर (सांकेतिक तस्वीर)
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पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनातनी के बीच भारत चीन को एक और झटका देने की तैयारी में है। भारत सरकार अब दूरसंचार क्षेत्र की कई चीनी कंपनियों को काली सूची में डालने की योजना बना रही है। इसके बाद दूरसंचार क्षेत्र से जुड़ी इकाइयां और फर्म इन कंपनियों से न तो सेवा हासिल कर पाएंगी और न ही किसी प्रकार का उपकरण ही खरीद पाएंगी।
सूत्रों के मुताबिक, इंडिया ट्रस्टेड सोर्स के रूप में कंपनियों की सूची तैयार की जा सकती है। सूची में दो श्रेणियां होंगी। एक विश्वसनीय स्रोत तो दूसरी अविश्वसनीय स्रोत होगी। दूसरी श्रेणी में कई चीनी कंपनियों को शामिल किया जाएगा। दूरसंचार क्षेत्र से जुड़ी इकाइयां सिर्फ विश्वसनीय स्रोत में शामिल कंपनियों से ही सेवा और उपकरण खरीद सकेंगी।
दरअसल, भारत ने चीन की कई मोर्चों पर घेरने की रणनीति बनाई है। इसी क्रम में सबसे पहले चरणबद्ध तरीके से चीन की कई एप पर प्रतिबंध लगाया गया। अब चीन को भारतीय दूरसंचार क्षेत्र से दूर रखकर आर्थिक झटका देने की रणनीति को अमली जामा पहनाया जा रहा है।
दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की कमेटी ने विश्वसनीय क्षेत्र की सुरक्षा बढ़ाने का निर्णय लिया था। इसके तहत देश की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए कई कदम उठाए गए हैं। बस हम यह बताने जा रहे हैं कि कौन हमारे ट्रस्टेड सोर्स हैं और कौन नहीं हैं।