एक अन्य अधिकारी ने बताया कि गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स इलाकों में चीन के करीब 60 सैनिक अप्रैल, 2020 की स्थिति से आगे मौजूद हैं। इस इलाके को खाली करने की प्रक्रिया तब तक पूरी नहीं मानी जाएगी, जब तक चीन अपने सैनिक नहीं हटाएगा। एक बार यह चरण पूरा हो जाए, इसके बाद देपसांग इलाके में भारतीय सेना के पट्रोलिंग अधिकारों के मुद्दे पर आगे बढ़ा जाएगा। यह मुद्दा साल 2013 से बना हुआ है।'
रणनीतिक तौर से बेहद अहम हैं इलाके
दरअसल, ये क्षेत्र भारत और चीन दोनों के लिए रणनीतिक तौर पर बेहद अहम है। चीनी सेना गोगरा, हॉट स्प्रिंग और कोंगका ला क्षेत्र से इलाके में तैनात अपने सैनिकों के लिए भारी मात्रा में रसद पहुंचा पाती है। दसवें दौर की सैन्य वार्ता 20 फरवरी को हुई थी। दोनों देशों की सेनाएं पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों से अपने-अपने सैनिक और हथियारों को पीछे हटाने पर राजी हुईं थीं। हालांकि, अब चीन इसमें आनाकानी कर रहा है।