11-12 दिसंबर को आसियान इंडिया कनेक्टिविटी समिट हो रही है और 25 जनवरी 2018 को आसियान देशों के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी के पांच साल पूरे होने पर भारत जश्न मनाएगा। इसमें आसियान देशों के सभी राष्ट्राध्यक्ष मौजूद रहेंगे और इसके ठीक अगले दिन गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजपथ पर आयोजित समारोह में भी हिस्सा लेंगे। विदेश मंत्रालय नोडल एजेंसी के रूप में इसकी जोर-शोर से तैयारियों में लगा है। यह भारत की एक बड़ी कूटनीतिक पहल है और इस पर पड़ोसी देश चीन की निगाह है।
भारत की यह पहल आसियान देशों में बाजार तलाशने, आवाजाही बढ़ाने, कारोबार को नई दिशा देने, आपसी तालमेल बढ़ाने की दिशा में काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कनेक्टिविटी समिट के जरिए भारत आसियान देशों के मास्टर प्लान के साथ अपने और जापान के बीच चल रही मेगा परियोजनाओं के बीच सामंजस्य बिठाने की कोशिश कर रहा है। इसे पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के समय (1992) में शुरू की गई लुक ईस्ट पॉलिसी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में विस्तार करके एक्ट ईस्ट पॉलिसी के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि भारत और आसियान देश 2012 से रणनीतिक साझीदार देश हैं, इसलिए इसे इस गठजोड़ की पांचवी सालगिरह मनाए जाने के रूप में भी देखा जा रहा है।
द्वीपों के विकास की योजना
भारत आसियान देशों के साथ मिलकर द्वीपों का विकास करने की योजना बना रहा है। द्वीपों से आसियान देशों की कनेक्टिविटी बढ़ाए जाने की योजना भी इसमें शामिल है। लक्ष्यद्वीप से लेकर अन्य से आसियान देशों की आवाजाही बढ़ने पर न केवल आसियान देशों से संपर्क बढ़ेगा, बल्कि समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा को भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। मौजूदा समय में अंडमान निकोबार से लेकर देश के अन्य हिस्सों में तमाम मानवरहित द्वीप हैं। इन द्वीपों की सुरक्षा भी बड़ा मसला है। समुद्री तस्कर, अपराधी समेत अन्य इन क्षेत्रों में आकर लंबे समय तक रुकते हैं और चले जाते हैं। पता ही नहीं चलता। माना जा रहा है कि समुद्री क्षेत्र में आवाजाही बढ़ने से इस तरह की गतिविधियों पर लगाम लगाई जा सकेगी।
रोड कनेक्टिविटी को करेंगे बेहतर
भारत पश्चिम बंगाल से उत्तर-पूर्व होते म्यांमार तक जाने वाली सड़क परियोजना को उन्नत बनाने पर कार्य कर रहा है। आसियान देशों के साथ संपर्क को बढ़ावा देने के क्रम में इस हाईवे को थाईलैंड त्रिस्तरीय हाईवे से जोड़ने की योजना है। थाईलैंड से इस हाईवे का विस्तार कंबोडिया-लाओ पीडीआर-वियतनाम के लिए हो जाएगा। सड़क मार्ग के जरिए फर्राटा भरते हुए इन देशों तक जाया जा सकेगा। इससे जहां भारत को थाईलैंड से लेकर कंबोडिया और उसके आगे तक का व्यापार, कारोबार के लिए बाजार मिल जाएगा वहीं लोगों से लोगों के संपर्क को बढ़ावा मिलेगा। कलादान मल्टीमोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट इसी का हिस्सा है।
इस तरह से उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा, एशिया अफ्रीका ग्रोथ कॉरिडोर की तरह आसियान देशों तक भारत की सीधी पहुंच मील का पत्थर साबित होगी। बिजनेस कनेक्टिविटी समिट में इन सभी उपायों पर चर्चा होने, परियोजना में आ रही रुकावटों तथा इसके समाधान की दिशा में आगे बढऩे की संभावना है। इससे 25 दिसंबर को आसियान देशों के शिखर नेताओं के साथ सम्मेलन में एक्ट ईस्ट पॉलिसी को उसका आकार दिया जा सकेगा।
इनकी होगी बड़ी भूमिका
केंद्रीय भूतल परिवहन एवं जहाज रानी मंत्री नितिन गड़करी आसियान देशों के साथ सड़क तथा समुद्री रास्ते के संपर्क बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसके लिए गड़करी का मंत्रालय आसियान देशों के 2025 के मास्टर प्लान के साथ सामंजस्य बनाने की संभावनाओं पर गौर कर रहा है। म्यांमार और थाईलैंड के साथ त्रिस्तरीय मोटरवाहन समझौते (ट्राईलैट्रल मोटर व् हीकल एग्रीमेंट, एमवीए) की प्रक्रिया जारी है। समुद्री जहाज की आवाजाही बढ़ाने के लिए भारत, म्यांमार, कंबोडिया, थाईलैंड, वियतनाम काम कर रहे हैं।
इसके लिए नई दिल्ली ने समुद्री परिवहन कार्य समूह (मैरीटाइम ट्रांसपोर्ट वर्किंग ग्रुप) का गठन किया है। दूर संचार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मनोज सिन्हा आसियान देशों के साथ डिजिटल कनेक्टिविटी की संभावनाओं को लेकर सक्रिय हैं। डिजिटल क्षेत्र में कनेक्टिविटी, निवेश, नेटवर्क का सामंजस्य बिठाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा इन देशों के नियमित हवाई उड़ान को सुविधाजनक तथा सक्रिय बनाने की पहल हो रही है। इस पूरे प्रयास में विदेश राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह को सक्रियता के साथ अमली जामा पहनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इन 4 वजहों से चीन है परेशान
कई आसियान देश निवेश की स्थिति आने पर संकोच कर सकते हैं। भारत ने इस दुविधा से बचने के लिए एक अरब डॉलर की क्रेडिट लाइन का प्रस्ताव दिया है। इससे भारत और आसियान देशों के बीच में डिजिटल, सडक़, हवाई, समुद्री और पीपुल-पीपुल कांटैक्ट परियोजनाओं की पहल में कोई रुकावट नहीं आएगी। इसके अलावा भारत ने 7.70 करोड़ डॉलर के डेवलपमेंट फंड की भी व्यवस्था की है। इसका उद्देश्य क्षेत्र में उत्पादन केंद्र को बढ़ावा देना है।
भारत और आसियान सम्मेलन अब हर साल होगा। इसका आयोजन भारत में या फिर बारी-बारी से आसियान देशों में किया जाएगा। आसियान देशों के साथ भारत आगे संबंध, सहयोग, संपर्क, रणनीतिक भागेदारी को मजबूत बनाने के उपायों पर काम करेगा। माना जा रहा है कि जल्द ही इसको लेकर कुछ और फोरम स्थापित किए जाने की भी घोषणा हो सकती है। इसके बाबत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25-26 जनवरी 2018 को आसियान देशों के शिखर नेताओं के साथ बैठक के बाद महत्वपूर्ण घोषणा कर सकते हैं।
1. विदेश मंत्रालय के अधिकारी इस सवाल पर कुछ नहीं कहना चाहते, लेकिन परोक्ष रूप से भारत ने पूरी दुनिया को बताने की कोशिश की है कि वह चीन की तरह किसी देश की संप्रभुता से खिलवाड़ करके वन बेल्ट वन रोड (ओबीओआर) जैसी परियोजना का पक्षधर नहीं है। चीन की वन बेल्ट वन रोड योजना पर भारत की गहरी नाराजगी है। भारत का कहना है कि यह उसके और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के विवादित क्षेत्र से होकर जा रही है। यह भारत की संप्रभुता से खिलवाड़ है।
2. भारत आसियान देशों के साथ कनेक्टिविटी को बढ़ावा देकर स्पष्ट करना चाहता है कि वह इस तरह की किसी विकास से जुड़ी योजना के विरुद्ध नहीं है।
3. भारत में बने सामान कंबोडिया, थाईलैंड, लाओस तक आसानी से जा सकेंगे, बाजार मिलेगा और इससे चीन के सस्ते लेकिन कम टिकाऊ बाजार को झटका लगेगा।
4. यह परियोजना चीन की ओबीओआर परियोजना की काट के साथ-साथ उसकी रिंग ऑफ पर्ल (समुद्र क्षेत्र में भारत को घेरने) योजना की भी काट है। इन देशों के साथ संबंध, संपर्क, सहयोग, सुरक्षा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संगठन की भूमिका निभाने में मदद करेंगे। इसकी एक बानगी अंतरराष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) में जज के चुनाव में मिले सहयोग के दौरान देखने को मिली।