राजदूत ने कहा कि किसी स्तर पर, अगर हमें कोरोना वायरस की इस पूरी घटना की पूरी समझ हासिल करनी है तो हमें उस मुद्दे को पारदर्शी, वैज्ञानिक रूप से, खुले तौर पर संबोधित करना होगा। इसलिए चीन को भी इससे जुड़ी जानकारी दुनिया को देनी होगी। उन्होंने कहा कि हालांकि, इसके लिए एक निश्चित समय और स्थान होगा जब हम मौजूदा संकट को दूर करेंगे।
राजदूत अकबरुद्दीन ने कहा कि यह अब तक सबसे खराब संकट है। भारत ने अपनी आजादी के बाद अब तक ऐसा संकट नहीं देखा है। साथ ही यह 100 साल का सबसे बुरा वैश्विक संकट है। उन्होंने कह कि हम सबसे बड़े वैश्विक संकट को झेल रहे है, जो भारत के लिए आजादी के बाद सबसे बड़े संकट के रूप में आया है।
राजदूत ने कहा कि यह एक बहुआयामी संकट है जिसके मूल में यह एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट है क्योंकि इससे मरने वालों की संख्या में दिनों-दिन बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने कहा कि इस वैश्विक आपदा को लेकर पूर्वानुमान तेजी से बढ़ने लगे है। यह एक आर्थिक संकट में भी बदल गया है जिसको वैश्विक अर्थव्यवस्था ने सौ वर्षों में नहीं देखा था।
लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संकट का मुकाबला करने के लिए समन्वित वैश्विक प्रयासों की आवश्यकता होगी। लेकिन इस संकट से निपटने के लिए सबसे आगे प्रत्येक राष्ट्रीय सरकार है और उसे अपने देश को इससे बाहर निकालने के लिए अपनी नेतृत्व क्षमता को बढ़ाना होगा।
भारतीय राजदूत ने कहा कि इस लड़ाई में राष्ट्रीय सरकारें हैं जो सबसे आगे हैं। उनके पास साधन है। सार्वजनिक, अंतर-राज्य, बहुपक्षीय और विभिन्न अन्य संगठन जैसे अन्य संस्थान हर तरीके से सहायता करने की कोशिश कर रहे हैं जो वे कर सकते हैं।