चीन अब अपनी आक्रमकता को लेकर संकट में फंसता हुआ दिख रहा है। भारत के साथ लद्दाख के पहाड़ों पर उलझे चीन ने अब प्रशांत महासागर में अपना पूरा ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया। क्योंकि अमेरिकी नौसेना के तीन जहाजों ने अब सागर में भी ड्रैगन की चुनौती को बढ़ा दिया है। शुक्रवार को अमेरिका के विदेश मंत्री ने भी साफ कर दिया है कि अमेरिकी सेना की मौजूदगी एशिया में बढ़ाई जा रही है।
नेशनल सिक्यॉरिटी एडवाइजरी में हाल ही में कार्यकाल पूरा करने वाले नौसेना एक्सपर्ट वाइस-एडमिरल अनिल चोपड़ा ने कहा कि नौसेना के मूवमेंट से चीजें आगे बढ़ती हैं। जब आप टकराव वाले इलाकों में उन्हें ले जाते हैं तो यह एक संदेश भेजता है। चीन को इस बात की चिंता होगी कि ये क्या कर सकते हैं ना कि वास्तव में ये क्या करेंगे। एक अमेरिका जहाज प्रशांत तट से दूर है, जबकि दूसरा फिलीपींस के पास है और तीसरा थियोडोरे रूजवेल्ट वियतनाम की ओर बढ़ रहा है।
पेंटागन के एशिया-पैसिफिक सेंटर फॉर सिक्यॉरिटी स्टडीज के प्रफेसर मोहन मलिक कहते हैं, 'इस लोकेशन का मतलब है कि युद्ध की स्थिति में इन जहाजों को मलक्का जलडमरूमध्य और बंगाल की खाड़ी में तैनात किया जा सकता है।