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NEET-JEE पर चीन का खुराफाती तंज: गाओकाओ का हवाला देकर भारत के परीक्षा पर सवाल; वैश्विक स्तर पर घेरने की कोशिश

Fri, 12 Jun 2026 06:44 AM IST
शिवम गर्ग अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

भारत की परीक्षा प्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। चीन की एक सोशल मीडिया पोस्ट में गाओकाओ का उदाहरण देकर NEET और JEE की तुलना किए जाने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर बहस तेज हो गई है।
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भारत की परीक्षा प्रणाली पर चीन की टिप्पणी। - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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नीट पेपर लीक की शर्म अभी ताजी थी। लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटका था और संसद से लेकर सड़क तक हंगामा बरपा था। ठीक इसी नाजुक मोड़ पर भारत में चीन की दूतावास अधिकारी यू जिंग ने एक्स पर एक पोस्ट किया। उनका यह तीर सीधे हमारी परीक्षा प्रणाली की दरारों पर जाकर लगा। यू जिंग ने चीन की गाओकाओ परीक्षा का उल्लेख किया। यह भारत की जेईई और नीट का मिला-जुला रूप है।

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गाओकाओ में मात्र दो दिनों में 1.3 करोड़ छात्रों की परीक्षा बिना किसी व्यवधान के संपन्न हो गई। इसके लिए चीन के कारखाने रुके, सड़कें सूनी रहीं और पूरा देश अपने छात्रों के लिए एकजुट हो गया। चीनी राजनयिक ने अपने ट्वीट में किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन हैशटैग में नीट, जेईई और इंडिया लिखकर निशाना बिल्कुल साफ कर दिया।
 
यह पोस्ट महज संयोग नहीं, बल्कि बीजिंग की सोची-समझी कूटनीतिक खुराफात का हिस्सा है। पोस्ट ठीक उसी समय किया गया जब भारत की संसदीय समिति ने एनटीए और संबंधित मंत्रालयों के अधिकारियों को तलब कर नसीहत दी थी कि इतनी बड़ी परीक्षाओं के पारदर्शी संचालन के लिए हमें चीन की व्यवस्था से सीखना चाहिए। हमारी अपनी संसदीय समिति ने आत्ममंथन के लिए जिस मॉडल का जिक्र किया, चीन ने भारत को नीचा दिखाने के मनोवैज्ञानिक हथियार की तरह भुना लिया।

बंटे हुए राजनीतिक नेतृत्व पर भी चीन का निशाना
राहुल गांधी से लेकर तमाम विपक्षी नेता शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगते रहे। पर एक भी विपक्षी दल ने आगे बढ़कर नहीं कहा कि हम राजनीति से ऊपर उठकर परीक्षा प्रणाली दुरुस्त करने के लिए सरकार के साथ बैठने को तैयार हैं। चीनी अधिकारी ने जब लिखा कि पूरा देश एकजुट हो गया... तो यह व्यंग्य सिर्फ सरकार की नाकामी पर नहीं, बल्कि भारत के घंटे राजनीतिक नेतृत्व पर भी था।
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पर्दे के पीछे छुपा गाओकाओ का सच
चीन खुद को परीक्षा शुचिता का मसीहा साबित करने की कोशिश कर रहा है, पर उसकी अपनी व्यवस्था का सच लोहे के पर्दे के पीछे कैद है। गाओकाओ में भी प्रॉक्सी परीक्षार्थियों का संगठित सिंडिकेट, हाई-टेक ब्लूद्ध डिवाइस से सामूहिक नकल और अफसरों की मिलीभगत से पेपर लीक का लंबा और काला इतिहास रहा है। फर्क इतना है कि अधिनायकवादी कम्युनिस्ट देश चीन में सच बोलने वाली जुबान खामोश कर दी जाती है।

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