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इंडियन मिलिट्री डिप्लोमेसी के लिए चुनौती बन रहा है चीन

Fri, 20 Apr 2018 03:10 PM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
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भारत और चीन
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चीन ने हिंद महासागर क्षेत्र में इंडियन मिलिट्री डिप्लोमेसी को खुली चुनौती देना शुरू कर दिया है। तीन चीनी युद्धपोतों के दिखाई देने को उसकी भावी आक्रामक नीति से जोड़कर देखा जा रहा है। सैन्य मामलों के जानकार इसे उसकी रिंग ऑफ पर्ल की दिशा में बढ़ाए गए कदम के साथ-साथ दक्षिण चीन सागर की रणनीति से भी जोड़कर देख रहे हैं। मेजर जनरल (रिटायर्ड) अशोक मेहता का भी मानना है कि यह खुली चुनौती है। चीन एंटी पायरेसी की आड़ में अपने युद्धपोत हिंद महासागर क्षेत्र में भेज रहा है। आने वाले समय में उसकी यह कोशिश बढ़ सकती है।
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क्या हुआ ?

पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) चीन की 29वी एंटी पाइरेसी फोर्स के तीन युद्धपोत हिंद महासागर की सीमा में दिखाई दिए। यह युद्धपोत समुद्री क्षेत्र में पाइरेसी के खिलाफ अभियान (पेट्रोलिंग) के उद्देश्य से आए थे। इस पर भारतीय नौसेना ने पहले हल्के फुल्के अंदाज में ट्वीट करके इनका स्वागत किया। अपने ट्वीट में भारतीय नौसेना ने कहा कि पीएलए-नेवी की 29वीं एंटी पाइरेसी एस्कॉर्ट फोर्स का हिंद महासागर क्षेत्र में स्वागत है। हैप्पी हंटिंग।

भारतीय नौसेना का यह ट्वीट चीन की हिंद महासागरीय क्षेत्र में नौसैनिक डिप्लोमेसी पर मजाकिया अंदाज में किया गया तंज था। इसके बाद भारतीय नौसेना का दूसरा ट्वीट आया। इस ट्वीट में भारतीय नौसेना ने हिंद महासागरीय क्षेत्र में चीन को अपनी मौजूदगी का एहसास कराया। भारतीय नौसेना अपने जहाजों, पेट्रोलिंग मैनेजमेंट का नक्शा जारी करते हुए कहा कि भारतीय नौसेना फारस की खाड़ी से लेकर मलक्का जल डमरू, बंगाल की खाड़ी से हिंद महासागर तक और पूर्वी अफ्रीकी छोर तक 24 घंटे लगातार सतर्क रहती है। भारतीय नौसेना ने कहा कि वह अपने क्षेत्र की निगरानी, इसकी सुरक्षा करने में हर समय सक्षम है।
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क्या है इसके माने

भारत-चीन - फोटो : The Washington Post
हिंद महासागर क्षेत्र का पहला महत्व तो यह है कि यहां से दुनिया का 50 प्रतिशत समुद्री व्यापार होता है। ऑयल ट्रेड का रूट है। दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान ने मिलकर क्वाड्रीलैट्रल फोरम बनाया है। चीन इससे चिढ़ता है। अमेरिका दक्षिण चीन सागर में लगातार आक्रमक भूमिका में है और भारत दक्षिण चीन सागर में स्वतंत्र और भयरहित नौवहन का पक्षधर है।

जापान और आस्ट्रेलिया चीन के दक्षिण चीन सागर में प्रभुत्व बनाने, एकाधिकार जमाने का विरोध करते हैं। इसके बरअक्स चीन दक्षिण चीन सागर को अपना क्षेत्र बताता है। उसने वहां सैन्य बेस बना लिए हैं और इसके लिए वह अमेरिका के सामने तनकर खड़ा हो जाता है। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन के बढ़ रहे प्रयास को दक्षिण चीन सागर की स्थिति, चीन की रिंग ऑफ पर्ल तथा हिंद महासागर क्षेत्र में प्रभाव बढ़ाने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

भारत के दोनों ओर चीन

चीन भारत पर अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। नेपाल और श्रीलंका में अपनी पकड़ बढ़ा रहा है। श्रीलंका के हंबनटोटा पोर्ट को विकसित कर रहा है। पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह और वन रोड, वन बेल्ट की परियोजना पर काम कर रहा है। भारत से लगती भूटान की सीमा डोकलाम में उसके साथ कूटनीतिक रस्साकशी जारी है। इसके अलावा पहली बार चीन ने मालदीव में अपनी मजबूती का एहसास कराया है। उसकी शह पर मालदीव ने भारत द्वारा सैन्य सहायता स्वरुप दिए हेलीकॉप्टर को भी लौटा दिया है। चीन के इन प्रयासों का मकसद भारत के अगल-बगल अपना दबाव बढ़ाना है। यह सब उसकी रिंग ऑफ पर्ल का हिस्सा माना जा रहा है।

 
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भारत के कान खड़े हैं

india china
चीन की हिंद महासागर क्षेत्र में आवाजाही को लेकर भारत के कान खड़े हैं। मेजर जनरल अशोक मेहता का कहना है कि भारत ने 2014 में श्रीलंका को भी इसके लिए चेताया था। भारत ने श्रीलंका से संबंधों का हवाला देते हुए कहा था कि उसके बंदरगाहों पर चीन की पनडुब्बी आदि नहीं आनी चाहिए। मेजर जनरल का कहना है कि इसके बाद से चीन की पनडुब्बी श्रीलंका के तटों तक नहीं गई है। जिबूती में भी चीन ने अपना बेस बनाया है।

फरवरी 2018 में नौसेनाध्यक्ष एडमिरल सुनील लांबा ने भी माना था कि हिंद महासागरीय क्षेत्र में चीन की पनडुब्बियों की आवाजाही बढ़ रही है। हालांकि चीन इसे एंटी पायरेसी अभियान के तौर पर प्रस्तुत करता है, लेकिन वास्तव में यह भारतीय नौसेना के लिए चिंता की बात है। खुद एडमिरल ने भी स्वीकार किया था कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना लगातार चीन की गतिविधियों पर नजर रख रही है और सामुद्रिक हितों की सुरक्षा के लिए सतर्क है।

क्या रुकेगा चीन ?

नौसेना मुख्यालय के सूत्र चीन की हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ रही आवाजाही को लेकर सतर्क हैं, लेकिन चीन का यह कदम रोक पाने के बारे में कुछ नहीं बता पाते। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में कोई भी देश स्वतंत्र नौवहन कर सकता है। इसलिए हिंद महासागर क्षेत्र में चीन के युद्धपोत को आने से रोकना कानून का उल्लंघन होगा।

इसके जवाब में मेजर जनरल मेहता का कहना है कि चीन को रोक पाना मुश्किल है। चीन लगातार अपनी सेना का आधुनिकीकरण कर रहा है। सैन्य साजो सामान को अपडेट कर रहा है। वह सीधे अपनी तुलना अमेरिका से कर रहा है और भारत, अमेरिका, आस्ट्रेलिया तथा जापान के सहयोग से बने फोरम के सामानांतर खड़ा है। इसलिए उसे रोकना संभव नहीं लगता। चीन के पास आर्थिक और सैन्य ताकत दोनों है। भारत के साथ वह चुनौती बनकर खड़ा है। मेजर जनरल के अनुसार यह ड्रैगन की रणनीति रही है। वह धीरे-धीरे और लगातार आगे बढ़ता जाता है।
 
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