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अरुणाचल में 1 किमी घुसी चीनी सेना, सड़क बनाने आई थी नापती हुई उल्टे पांव भागी

Thu, 04 Jan 2018 09:49 AM IST
एजेंसी, ईटानगर/नई दिल्ली
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अरुणाचल
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चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। 73 दिन चला डोकलम विवाद अभी शांत ही हुआ है कि उसने अरुणाचल में घुसपैठ कर दी। सरकार के सूत्रों के अनुसार, चीन की सड़क निर्माण टीमें दिसंबर के आखिरी हफ्ते में अरुणाचल के तूतिंग में एक किलोमीटर अंदर तक घुस आईं। भारतीय सैनिकों से सामना होने पर वे सामान छोड़कर चले गए। हालांकि सरहदी गांववालों का दावा है कि वहां चीनी सैनिक सड़क बनाने के लिए कटान कर रहे थे।
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सूत्रों के अनुसार, चीनी दल जो सामान छोड़कर भागा है, उनमें सड़क बनाने वाले औजार व खुदाई करने वाले उपकरण शामिल हैं। घटना 28 दिसंबर की बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, गश्त लगा रहे आईटीबीपी जवानों ने देखा कि तूतिंग इलाके में सीमा से एक किमी अंदर कुछ चीनी सड़क निर्माण गतिविधियों में लगे हैं। हालांकि इस दौरान ‘कोई तनातनी’ नहीं हुई। इस मुद्दे को तय प्रक्रिया के जरिये सुलझा लिया गया।

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उधर, गांववाले दावा कर रहे हैं कि चीनी सैनिक सड़क बना रहे थे। सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें तूतिंग उपखंड के बिसिंग गांव के पास रोका। सैनिकों का चीनी सेना से आमना-सामना भी हुआ। इसके बाद उनकी सड़क निर्माण मशीनों को जब्त कर लिया गया। उधर, संपर्क किए जाने पर अपर सियांग के डीसी डुली कामदक ने कहा, तूतिंग उपखंड में हमारे अधिकारियों ने चीन की किसी घुसपैठ की सूचना नहीं दी है।
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घटनास्थल पर मौजूद है भारतीय सेना

अरुणाचल
सरहदी गांव जीडो के न्योमिन टेकसेंग और गैलिंग गांव के पेमा नायसिर के अनुसार, गैलिंग के पास सियांग नदी के तट से साफ देख सकते हैं कि वहां सड़क के लिए कटाई हुई है। यहां से इसकी हवाई दूरी 7-8 किलोमीटर है। भारत और चीनी सैनिकों ने ताजा काटी गई सड़क पर टेंट लगा लिए थे। वहां बड़े पत्थरों की दीवार खड़ी कर दी। गांववालों ने ही पुलिस को चीनी सैनिकों के सड़क बनाने की खबर दी। 

इस पर उसने बिसिंग के पास मेडोक में तैनात आईटीबीपी को अलर्ट किया। सूचना मिलने पर आईटीबीपी कर्मी मौके पर पहुंचे और चीनी सैनिकों को लौटने को कहा। बताया जाता है कि इस दौरान दोनों पक्षों में बहस भी हुई और चीनी दल ने पीछे हटने से इनकार कर दिया था। गतिरोध वाली जगह पर सेना की ओर से भी गश्ती दल भेजा गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, जवान अभी वहीं मौजूद हैं। यह इलाका आईटीबीपी की निगरानी में है, लेकिन यहां सेना की भी भारी तैनाती है। 
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