रक्षा मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार, 2025 में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) सैनिकों की तैनाती में कमी आई है, जबकि भारतीय सेना ने सभी सेक्टरों में अपनी मजबूत और तैयार स्थिति बरकरार रखी है। ताकि किसी भी उभरती चुनौती या आकस्मिक स्थिति का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके। जम्मू-कश्मीर में भी सुरक्षा स्थिति नियंत्रण में रही, हिंसा और विरोध प्रदर्शनों में कमी आई तथा पत्थरबाजी की घटनाएं शून्य रहीं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जम्मू-कश्मीर और एलओसी पर हालात में बड़ा बदलाव आया, लेकिन 10 और 12 मई की DGsMO स्तर की बातचीत के बाद स्थिति काफी हद तक स्थिर होने के बावजूद अब भी अप्रत्याशित बनी हुई है।
उत्तरी सीमा पर PLA की तैनाती में आई कमी
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 के दौरान उत्तरी सीमाओं के सामने पीएलए की तैनाती में महत्वपूर्ण कमी हुई। चीन की सेना की लगभग 10 कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड के आकार की टुकड़ियां एलएसी से लगे इलाकों और अपने पारंपरिक प्रशिक्षण क्षेत्रों में तैनात रहीं। यानी चीन ने सीमा पर अपनी सैन्य मौजूदगी को पहले की तुलना में सीमित किया, लेकिन उसकी सैन्य गतिविधियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।
एलएसी पर भारतीय सेना पूरी तरह मुस्तैद
रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि एलएसी के सभी सेक्टरों में भारतीय सेना की तैनाती मजबूत, संतुलित और पूरी तरह तैयार है। सेना ने सभी क्षेत्रों में अपनी स्थिति इस तरह बनाए रखी है कि किसी भी संभावित आपात स्थिति या नई चुनौती से निपटा जा सके। सीमा पर भारतीय सेना की तैनाती को मजबूत और रणनीतिक रूप से सक्षम बनाए रखा गया है।
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति नियंत्रण में
रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर की स्थिति का भी उल्लेख किया गया है। इसके मुताबिक, भारतीय सेना के लगातार प्रयासों के कारण जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति मजबूती से नियंत्रण में बनी हुई है। सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और निगरानी का असर हिंसा के स्तर में कमी के रूप में सामने आया है।
हिंसा में कमी, विरोध प्रदर्शन भी हुए सीमित
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में हिंसा की घटनाओं में कमी आई है। इसके साथ ही विरोध प्रदर्शनों का स्तर भी घटा है। रिपोर्ट में खास तौर पर कहा गया है कि पत्थरबाजी की घटनाएं अब शून्य हो गई हैं। यह क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति में आए सुधार का एक महत्वपूर्ण संकेत माना गया है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बदले हालात
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जम्मू-कश्मीर के भीतर और नियंत्रण रेखा के आसपास की स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव आया। इस दौरान सुरक्षा परिदृश्य और सीमा की स्थिति में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिला, जिसका असर क्षेत्र की समग्र सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा।
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DGsMO की बातचीत के बाद स्थिति स्थिर
हालांकि, 10 और 12 मई 2025 को भारत और पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशकों के स्तर पर हुई बातचीत के बाद स्थिति काफी हद तक स्थिर हुई है। इसके बावजूद रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि हालात में पूरी तरह निश्चितता नहीं आई है और स्थिति अब भी अप्रत्याशित बनी हुई है। इसलिए सुरक्षा बलों को किसी भी संभावित बदलाव या नई चुनौती के लिए सतर्क रखा गया है।