आप सोचेंगे कि बदलते भारत की तस्वीरों के बीच ये क्या है। बता दें कि ये कोई पर्यटक अजूबा नहीं बल्कि लोगों की मजबूरी का जीता जागता उदाहरण है। पूर्वोत्तर भारत का ये अरुणाचल प्रदेश है जहां लोगों को एक छोर से दूसरे छोर पर जाने के लिए इसी खतरे से गुजरना पड़ता है। ये कहने को तो पुल है लेकिन इसकी मजबूती की कोई गारंटी नहीं है।
प्रदेश में लोहित नदी के उत्तरी और पश्चिमी हिस्से की यही कनेक्टिविटी है। विकास से कोसों दूर पूर्वोत्तर का ये हिस्सा चीन के दबाव से पीड़ित है। सीमा विवाद में पिस रहे ऐसे परिवार हर दिन ऐसे खतरों से दो-चार होते हैं। यहां भारत को विकास की बुनियाद पर ही चीन से खतरा है। सीमा विवाद के चलते भारत चाह कर भी कई योजनाएं शुरू नहीं कर सका है।
वहीं चीन का बढ़ता दबाव इन गांव की खुशहाली पर ग्रहण लगाए है। लोग जो खतरा मोल उठाकर यहां रह रहे हैं, वो मदद के लिए सरकार से उम्मीद लगाए हुए हैं। ऐसे में अब इससे बड़ी मजबूरी और क्या होगी कि जीने के लिए मौत का रास्ता चुनना पड़े।