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चीन की नापाक नजरों ने बढ़ाई भारत की चिंता

Sat, 20 May 2017 10:22 PM IST
amarujala.com - Written By: शशिधर पाठक
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चीन की लगातार भारत को चारों तरफ से घेरने की कोशिशों ने भारतीय राजनयिकों की चिंता बढ़ा दी है। दक्षिण एशिया और आसियान मामलों के विशेषज्ञ सूत्र के अनुसार चीन की वन बेल्ट, वन रोड नीति, रिंग पर्ल की नीति लगातार भारत को चारों तरफ से घेर रही है।
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इससे आने वाले समय में भारत के व्यापार, सुरक्षा, तथा ब्लू वॉटर इकोनॉमी पर बुरा असर पड़ सकता है। चीन ने केवल श्रीलंका के साथ बल्कि नेपाल, पाकिस्तान, मालदीव समेत कई देशों के तेजी से सामारिक और व्यापारिक रिश्ते को गति दे रहा है।

विदेश नीति मामलों के जानकार राजीव शर्मा का भी कहना है कि चीन समुद्री क्षेत्र, रेल, सडक़ समेत सभी संपर्क मार्गों को विस्तार करने में लगा है। इसके बरअक्स भारत की स्थिति लगातार चिंता बढ़ाने वाली बन रही है।
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हाल में चीन ने नेपाल के साथ वन बेल्ट, वन रोड परियोजना में समझौता किया है। इसके तहत चीन तिब्बत के रास्ते नेपाल तक सडक़ मार्ग के विकास को धार देगा। इसी क्रम में चीन नेपाल तक अपने रेलमार्ग के विकास को भी गति दे रहा है।

उसकी योजना रसुआगढ़ से नेपाल के बीरगंज तक अपनी रेल सेवा लेकर आने की है। बीरगंज से बिहार राज्य से सटा हुआ(करीब240 किमी) है। इसके अलावा नेपाल में लगातार चीन की मौजूदगी बढ़ रही है।

यही स्थिति  श्रीलंका में भी है। चीन ने श्रीलंका हंबनटोटा बंदरगाह के विकास में रुचि दिखाई थी। पिछले कुछ वर्षों से दोनों देशों के बीच में लगातार आवाजाही बढ़ रही है। चीन श्रीलंका की 18 परियोजनाओं में दिलचस्पी ले रहा है।

हंबनटोटा पोर्ट का विकास, आपरेशन, इंडस्ट्रियल जोन, कोलंबो पोर्ट सिटी का विकास प्रमुख है। श्रीलंका में सडक़ आदि का जाल बिछाने के लिए चीन ने परियोजनाओं में दिलचस्पी लेनी शुरू कर दी है।

अफगानिस्तान में चीन की दिलचस्पी बढ़ रही है और पाकिस्तान के ग्वादर में बंदरगाह के विकास से लेकर बिजिंग तक सिल्क रोड का विकास उसके एजेंडे में है। यूरोप और एशिया को सडक़ मार्ग से जोडऩे की नीति पर काम कर रही है।

इसी के अंर्तगत उसकी योजना अपनी कनेक्टिविटी के विस्तार है। जबकि भारत लगातार पाक अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरने वाली चीन की वन बेल्ट वन रोड योजना का विरोध कर रहे है। चीन की इन्ही कोशिशों को संतुलित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मई के दूसरे सप्ताह में श्रीलंका का दौरा किया था।
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क्या है भारत की काट

पड़ोसियों से बेहतर संबंध। नौसेना, सेना और वायुसेना के साथ अन्य देशों से संबंध, सैन्य डिप्लोमेसी को बढ़ावा। जापान, अमेरिका, रूस समेत मित्र देशों के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क में विस्तार करना।

माना जा रहा है कि जून के महीने में प्रधानमंत्री मोदी इस लक्ष्य को साधने के लिए रूस का दौरा करेंगे। संघाई सहयोग संघ की बैठक के दौरान वह राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन से न केवल द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा करेंगे बल्कि रूस, चीन, भारत के बीच संतुलित संबंध पर भी विमर्श के आसार हैं। भारत इस दौरान कजागिस्तान, किर्गिस्तान समेत अन्य  देशों के साथ कनेक्टिविटी बढ़ाने समेत अन्य उपायों पर चर्चा कर सकता है।

चाबहार बंदरगाह

भारत ने ईरान के चाबहार बंदरगाह परियोजना के विकास को तेजी से आगे बढ़ाने में रुचि दिखाई है। दोनों देशों के बीच इसके बाबत सहमति भी बन चुकी है। पहले प्रथम चरण के विकास के बाद नई दिल्ली की योजना तेहरान(ईरान) से अफगानिस्तान तक सीधी पहुंच बनाने की है।

यहां से अफगानिस्तान के अन्य प्रांतों में रेल, सडक़ परियोजना के विकास के साथ-साथ मध्य एशिया तक सीधी पहुंच सुनिश्चित करना है। भारत सरकार ने पहले चरण में 23.5 करोड़ डॉलर का निवेश करने का प्रस्ताव दिया है।

इसमें से 15.0 करोड़ डॉलर एक्जिम बैंक की क्रेडिट लाइन के जरिए पोर्ट काम्पलेक्स के विकास में तथा शेष राशि बंदरगाह के आगे के विकास में निवेश शामिल है।

इसके लिए आदानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोल लिमिटेड, एस्सार समूह, जेएम बख्शी समूह और द इंडियन जोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड ने बंदरगाह के विकास में रुचि दिखाई है।
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