गंगा में 4200 करोड़ रुपये की बहुप्रतीक्षित जल परिवहन परियोजना पर चीन ने अपनी अनापत्ति दे दी है। वर्ल्ड बैंक की ओर से इसके लिए चीन के वित्त मंत्रालय को पत्र भेजा था। चीन के इंटरनेशनल फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशन डिवीजन 1 के निदेशक यंग युआनजिए ने वर्ल्ड बैंक के कंट्री डायरेक्टर को संबोधित पत्र लिखकर योजना पर किसी प्रकार की आपत्ति न होने की बात कही है।
जल परिवहन परियोजना के लिए विश्व बैंक ने बांग्लादेश और नेपाल से भी एनओसी मांगी है। गंगा में इलाहाबाद से हल्दिया तक 1620 किलोमीटर जलमार्ग विकसित किया जा रहा है। इस योजना की फंडिंग वर्ल्ड बैंक रहा है। वाराणसी सहित चार स्थानों पर मल्टी मॉडल टर्मिनल बनाए जा रहे हैं।
दरअसल, वर्ल्ड बैंक जब किसी परियोजना से जुड़ता है तो परियोजना से परोक्ष-अपरोक्ष रूप से जुड़े सभी देशों से एनओसी ली जाती है। आईडब्ल्यूएआई के प्रवक्ता बृजेश के मुताबिक चीन से एनओसी लेने के पीछे कारण यह है कि तिब्बत के कई जलस्रोतों से गंगोत्री को जलापूर्ति होती है।