पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव कम करने के लिए भारत व चीन के कोर कमांडरों की बुधवार को हुई 12 घंटे की बातचीत में दोनों पक्ष पीछे हटने पर सहमत हो गए हैं, लेकिन इसके तौर-तरीकों पर अभी सहमति की दरकार है। सूत्रों ने बताया कि चीन ने कोर कमांडर ने और मुलाकातों का आग्रह किया है, जिसमें तकनीकी बारीकियों पर बात होगी। बताया जा रहा है कि भारत की तरफ से बैक चैनल बातचीत जारी है।
सेना ने बुधवार को कहा कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि तनाव कम करने के लिए जितनी जल्दी हो सके समयबद्ध और क्रमबद्ध तरीके से मौजूदा तैनाती से पीछे हटा जाए। बातचीत काफी सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई। बातचीत 17 जून को दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की हुई बातचीत की मंशा के मुताबिक थी, जिसमें तय हुआ था कि दोनों पक्ष जिम्मेदाराना तरीके से तनाव कम करने की कोशिश करेंगे। मंगलवार को भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने किया, जबकि चीनी पक्ष का नेतृत्व तिब्बत सैन्य जिले के मेजर जनरल लियु लिन ने किया।
चरणबद्ध तरीके से हटेगी सेना
भारत-चीन कोर कमांडरों की मंगलवार को हुई बैठक के बाद चीन सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स के सुर बदल गए हैं। अखबार ने दावा किया कि दोनों देश वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अग्रिम मोर्चे पर तैनात सेनाओं को चरणबद्ध तरीके से हटाएंगे और सीमा पर हालात बेहतर करने के लिए प्रभावी कदम उठाएंगे।
चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सूत्र के हवाले से अखबार का कहना है कि, सैन्य कमांडरों की बातचीत में दोनों पक्षों ने सीमा पर तनाव घटाने और भविष्य में हालात बिगड़ने से परहेज करने के प्रति सहमति जताई। अखबार ने कहा, दोनों ही पक्ष मौजूदा सीमा वार्ता की प्रक्रिया, समझौतों का पालन और ऐतिहासिक तथ्यों के सम्मान करने पर भी राजी हुए। साथ ही दोनों एक-दूसरे की अहम चिंताओं को अवगत भी कराएंगे। इस पर बात पर भी जोर दिया गया कि दोनों ही पक्ष बातचीत से सहमति बनाने पर जोर देंगे।
मुलाकातें जारी रखने पर जोर दिया, कहा, दोनों पक्ष समझौतों और ऐतिहासिक तथ्यों का करेंगे सम्मान
दोनों के बीच सीमा पर हालात नियंत्रित करने के लिए और मतभेदों को सुलझाने के लिए प्रभावी तौर-तरीकों पर चर्चा हुई। दोनों ने क्षेत्र की स्थिरता और आपसी भरोसे को बढ़ाने के लिए ठोस उपायों पर भी बातचीत की। दोनों पक्ष सीमा पर तनाव घटाने और भविष्य में ऐसी तनातनी से बचने पर सहमति जताई। इसके साथ ही अखबार ने कहा कि जरूरी यह है कि भारत को चीन से मुलाकात जारी रखनी चाहिए। सीमावर्ती सैनिकों की कार्रवाइयों पर सख्ती से लगाम लगानी चाहिए। कट्टरपंथी कदम उठाने और जोखिम उठाने से बचना चाहिए और संयुक्त रूप से चीन-भारत सीमा क्षेत्रों में शांति कायम करनी चाहिए।