चीन की पिपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) पूर्वी लद्दाख के विवादित पैंगोंग झील के एक भाग में पुल का निर्माण कर रही है। सैटेलाईट इमेज से मिली जानकारी के मुताबिक हालांकि यह पुल निर्माण चीन अपने इलाके में कर रहा है। लेकिन पिछले दो साल से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर चल रही तनातनी के मद्देनजर विवादित इलाके में इस तरह का निर्माण उकसावे की हरकत के तौर पर देखा जा रहा है।
बताया जा रहा है कि सैन्य गतिरोध के 20 महीने बाद भी चीन ने लद्दाख में भारतीय क्षेत्र के सामने लगभग 60,000 सैनिकों को तैनात कर रखा है और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अपने बलों की तेजी से आवाजाही में मदद करने के लिए अपने बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है।
सरकारी सूत्रों के हवाले से एएनआई ने बताया कि गर्मियों के मौसम में चीनी सैनिकों की संख्या काफी बढ़ गई थी, क्योंकि वे गर्मियों में प्रशिक्षण के लिए बड़ी संख्या में सैनिकों को लाए थे। हालांकि, सर्दी में वे अब अपने पिछले स्थानों पर वापस चले गए हैं।हालांकि, वे अभी भी लद्दाख के विपरीत क्षेत्रों में लगभग 60,000 सैनिकों को बनाए हुए हैं।
दूसरी ओर सेटेलाईट इमेज की पड़ताल के बाद सेना सूत्रों का कहना है कि इससे सामरिक लिहाज से एक अहम इलाके में चीनी सेना अपने टैंक और ट्रूप को उत्तरी से दक्षिणी किनारे तक आसानी से ले जा सकती है। यह इमेज जियो-इंटेलिजेंस विशेषज्ञ डामीन साइमोन ने हालिस की है। इमेज के मुताबिक, पैंगोंग की एक पतली पट्टी पर यह काम तेजी से चल रहा है और उत्तरी किनारे को दक्षिणी किनारे से जोड़ता है।
सूत्रों के मुताबिक, 29-30 अगस्त 2020 को तनाव की चरम स्थिति में भारतीय सेना ने कैलाश रेंज में जिस तरह से त्वरित कार्रवाई कर चीनी सेना पर अपनी दबदबा कायम किया था, वह पीएलए की कल्पना से परे था। चीन की यह हरकत ऐसी स्थिति में अपनी सेना की जल्द तैनाती की योजना के तहत की जा रही है। गौरतलब है कि कैलाश रेंज में भारतीय सेना की उस कार्रवाई के बाद ही चीन पैंगांग से पीछे हटने को राजी हुआ था।
सेना के मुताबिक, पूर्वी लद्दाख में स्थिति अब भी तनावपूर्ण बनी हुई है। एलएसी के दोनों तरफ सेना की करीब पचास पचास हजार की नफरी विभिन्न ठिकानों पर पूरे हथियारों के साथ तैनात है। सरकारी सूत्रों ने बताया है कि गलवां घाटी में चीन झंडा लहराने और पीएलए के परेड करने की जो तस्वीर मीडिया में आयी है उसके कोई मायने नहीं। क्योंकि पीएलए ने यह हरकत अपने इलाके में की है। गलवां में जिस जगह चीन और भारत की सेना में हिंसक मुठभेड़ हुई थी वह झंडा लहराने वाली जगह से दूर है।