चीन ने ताइवान द्वीप के चारों ओर वायुसेना, नौसेना और रॉकेट बल के साथ बड़े संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू किए हैं। ताइवान ने इसे शांति के लिए खतरा बताते हुए अपनी सेना को हाई अलर्ट पर रखा है। इस अभ्यास की वजह से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ा है और एक लाख से ज्यादा यात्रियों के प्रभावित होने की आशंका है।
चीन की सेना ने सोमवार को ताइवान द्वीप के चारों ओर एक बड़ा संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू किया। इसके लिए चीन ने अपनी वायु सेना, नौसेना और रॉकेट बल के सैनिकों को भेजा है। बीजिंग ने इस कदम को अलगाववादी ताकतों और बाहरी हस्तक्षेप करने वालों के खिलाफ एक कड़ी चेतावनी बताया।
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ताइवान ने क्या कहा?
इस सैन्य गतिविधि पर ताइवान ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ताइवान ने कहा कि उसने अपनी सेना को पूरी तरह सतर्क कर दिया है। उन्होंने चीनी सरकार को शांति का सबसे बड़ा दुश्मन बताया है। इसको लेकर ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि वे स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं और अपनी संप्रभुता की रक्षा करेंगे।
एक लाख से ज्यादा यात्री होंगे परेशान
इस सबके बीच में ताइवान के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने जानकारी दी कि इस सैन्य अभ्यास का गहरा असर आम लोगों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि उड़ानों के रद्द होने या उनके मार्ग बदलने के कारण एक लाख से अधिक अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
क्या है वजह?
दो दिनों तक चलने वाले इस अभ्यास का पहला दिन बीजिंग की नाराजगी के बाद आया है। चीन इस क्षेत्र में अमेरिकी हथियारों की बिक्री और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के एक हालिया बयान से नाराज है। ताकाइची ने कहा था कि यदि चीन ताइवान के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई करता है, तो जापान की सेना इसमें हस्तक्षेप कर सकती है।
हालांकि, चीनी सेना ने सोमवार सुबह जारी अपने बयान में संयुक्त राज्य अमेरिका और जापान का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन संकेत स्पष्ट हैं कि यह शक्ति प्रदर्शन इन्हीं बयानों का जवाब है। बता दें कि ताइवान एक स्व-शासित द्वीप है, जिसे चीन अपना हिस्सा मानता है और उसे अपने शासन के अधीन लाना चाहता है।