फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मैंथॉल निर्यात में भारत को मिल रही चीन से चुनौती, निर्यातकों की तोड़ी कमर

Mon, 18 Sep 2017 05:31 AM IST
राकेश कुमार/ संभल
विज्ञापन
विज्ञापन
चीन अपने कारोबार का जाल पूरी दुनिया में फैलाने के लिए हर तरह के पैंतरे को अंजाम दे रहा है। मामला चाहे डंपिंग का हो या कुछ और, दूसरे देशों की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ने के लिए वह हर तरीका अपना रहा है। इसी कड़ी में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में बाहरी देशों के निर्यात को कमजोर करने के उद्देश्य से उसने इस क्षेत्र के देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापारिक समझौता किया है, जिसका भारत के निर्यात पर बिल्कुल प्रतिकूल असर पड़ रहा है। 
विज्ञापन

 
चीन और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के बीच हुए व्यापारिक समझौते का खामियाजा भारतीय निर्यातक उठा रहे हैं। मैंथॉल प्रोडक्ट के निर्यातक चीन के मुकाबले में पिछड़ रहे हैं। चीन से हुए समझौते के मुताबिक, दक्षिण पूर्व एशियाई देश, इंपोर्ट और एक्सपोर्ट ड्यूटी में एक-दूसरे को राहत देते हैं। इसीलिए व्यापारिक प्रतिद्वंद्विता में भारतीय निर्यातक इन देशों में चीन के सामने टिक नहीं पाते हैं।

पढ़ें- भारतीय इलाकों में चीन निर्मित गोले दाग रहा पाकिस्तान

हालांकि मैंथॉल प्रोडक्ट के कुल निर्यात में इन देशों की हिस्सेदारी लगभग 12 प्रतिशत ही है। लेकिन यह चिंताजनक इसलिए है, क्योंकि चीन भारत से ही मैंथॉल और मैंथा ऑयल खरीद कर दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में बेचकर भारत को ही पछाड़ रहा है।
विज्ञापन


मैंथा एसोसिएशन संभल के सचिव दीपक गुप्ता बताते हैं कि दक्षिण-पूर्व के देशों में चीन के कारोबारियों का बड़ा साम्राज्य है। वे एक दूसरे को आगे बढ़ाते हैं। इसीलिए वे भारतीय निर्यातकों के मुकाबले चीनी निर्यातकों से माल खरीदने को तरजीह देते हैं, जिसका असर भारत पर पड़ रहा है। 
विज्ञापन

चीन की चुनौती का नहीं होगा कोई असर

असल बात तो यह है कि मैंथा ऑयल भारत में ही पैदा होता है। यदि भारत सरकार मैंथा कारोबार को विशेष पैकेज और प्रोत्साहन देने की कोई योजना बनाए, तो मैंथॉल प्रोडक्ट के निर्यात में भारत की बादशाहत कायम रहेगी ही, चीन की चुनौती का भी इसपर कोई असर नहीं होगा।

द्विपक्षीय समझौते ने मुश्किल किए हालात
मैंथॉल निर्यातक आशुतोष रस्तोगी ने कहा कि चीन और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापारिक समझौता जहां भारत के लिए चुनौती है, वहीं इन देशों ने आपसी संबंधों में व्यापार करने पर एक-दूसरे को रियायतें दे रखी हैं।

जापान, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, कंबोडिया, थाइलैंड और सिंगापुर, इंडोनेशिया, फिलीपींस आदि देशों के चीन के साथ व्यापारिक समझौते हैं। यह देश एक दूसरे को आयात और निर्यात में ड्यूटी पर छूट देते हैं।

माल भारत का और मुनाफा चीन कमा रहा 
चंदौसी से मैंथॉल प्रोडक्ट के निर्यातक अंकुर अग्रवाल ने कहा कि भारतीय निर्यातक इन देशों में चीन की प्रतिस्पर्धा में अपना माल निर्यात नहीं कर पाते हैं, जबकि चीन भारत से कच्चा माल लेकर तैयार प्रोडक्ट इन देशों में बेचकर मुनाफा कमा रहा है।

भारतीय निर्यातक यूरोप और अमेरिका में निर्यात को प्राथमिकता दे रहे हैं। द्विपक्षीय व्यापारिक समझौते की वजह से चीन दक्षिण एशियाई देशों में केवल मैंथाल में ही नहीं, बल्कि दूसरे प्रोडक्ट में भी भारतीय निर्यातकों के लिए चुनौती बनकर उभरा है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें