चीन ने अमेरिकी ड्रोन एमक्यू-9 रीपर का मुकाबला करने के लिए अपने सीएच-5 रेनबो ड्रोन का व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है। यह ड्रोन जमीन के लक्ष्य पर निशाना साधने में समक्ष है। चीन के बेइहांग यूनिवर्सिटी के एयरोनोटिक्स साइंस और इंजीनियरिंग स्कूल के एसोसिएट प्रोफेसर वांग सोंग ने कहा कि पिछले सप्ताह शुक्रवार को व्यापक पैमाने पर उत्पादित सीएच-5 रेनबो की पहली उड़ान यह दर्शाती है कि चीन इस भारी सैन्य ड्रोन को निर्यात करने के लिए तैयार है। यह ड्रोन अमेरिका के एमक्यू-9 रीपर के बराबर है। इसे अमेरिकी ड्रोन के मुकाबले आधी लागत पर तैयार किया गया है। वांग ने कहा कि इस ड्रोन में अमेरिकी ड्रोन के मुकाबले एक कमजोरी भी है।
अमेरिकी ड्रोन 12 हजार से 15 हजार मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है, जो किसी भी जमीनी मिसाइल की पहुंच से दूर है। वहीं चीनी ड्रोन को नौ हजार मीटर से अधिक की ऊंचाई पर नहीं उड़ाया जा सकता है। वांग के अनुसार रेनबो की सीमित ऊंचाई इसके कमजोर इंजन के कारण है।
चीन विमान इंजन तकनीक में पश्चिम के मुकाबले अभी भी पीछे है। अमेरिका का रीपर या प्रिडेटर बी दुनिया का पहला मानव रहित विमान है जो आसमान से जमीन पर लक्ष्य को भेद सकता है। इसकी कीमत 1.69 करोड़ डॉलर है, जो इसे दुनिया का सबसे महंगा ड्रोन बनाती है। सरकारी सीजीटीएन टीवी ने भी सीएच-5 का वीडियो प्रसारित किया जिसमें उसे लक्ष्य को भेदते हुए दिखाया गया है।
सीएच-5 रेनबो
सीएच-5 रेनबो के विंग की लंबाई - 21 मीटर है जो 60 घंटे तक लगातार हवा में उड़े रहने की क्षमता रखता है। इसकी, रेंज 10 हजार किलोमीटर और वजन क्षमता- 1000 किलोग्राम है।