बच्चे स्कूलों में सुरक्षित नहीं हैं। राजधानी सहित देश के स्कूलों से बच्चों के साथ छेड़-छाड़ और हत्याओं के ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जिसने अभिभावकों को डरा कर रख दिया है। पैरेंट्स अपने बच्चों को स्कूल भेज देते हैं उनके बाद उनकी जान सांसत में बनी रहती है कि पता नहीं कब क्या खबर आ जाए। दिल्ली एनसीआर सहित देश के कई स्कूलों से बच्चों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार, हत्या की खबरें चौंका रही हैं।
दिल्ली से सटे गुरुग्राम में 8 सिंतबर को सात साल के प्रद्युम्न का शव स्कूल पहुंचने के महज 15 मिनट बाद ही स्कूल के टॉयलेट में मिला था जबकि अगस्त में गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित जीडी गोयनका स्कूल में अरमान सहगल की मौत से पूरा एनसीआर स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सहम गया था।
2016 में भी वसंत कुंज स्थित रायन स्कूल इंटरनेशल के एक छात्र देवांश की मौत ने भी स्कूल में बच्चों की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगाया था। देवांश के साथ स्कूल में कुकर्म (अप्राकृतिक कृत्य) की भी आशंका जताई गई थी देवांश के ऐनल प्वाइंट पर रूई लगी थी जबकि देवांश का शव पानी टंकी के पास मिला था। बड़ा सवाल ये है कि देवांश पानी टंकी के पास कैसे पहुंचा और उसके शव को टंकी से कैसे निकाला गया।
बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ शिक्षा की मूलभूत सुविधाओं और सुरक्षा की भी जरूरत होती है। लेकिन अगर पिछले कुछ दिनों में बच्चों के साथ घट रही घटनाओं पर नजर डालें तो ज्यादातर स्कूल और सरकारों ने इसपर कुछ खास ध्यान नहीं दिया है।