कविता डोके, रानी लालू जाधव, प्रसाद माणी
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महाराष्ट्र के आदिवासी बच्चों के लिए इस बार का बाल दिवस बहुत खास रहा। इन आदिवासी बच्चों में कविता डोके, रानी लालू जाधव, प्रसाद माणी और अनिल दुधौड़े शामिल थे। महाराष्ट्र के अहमद नगर जिले के अकोला ताल्लुका के माध्यमिक और उच्च माध्यमिक आश्रम में पढ़ने वाले इन बच्चों के परिवार गरीबी रेखा से नीचे आते हैं। इन बच्चों की पढ़ाई लिखाई से लेकर रहने तक का खर्च महाराष्ट्र सरकार का आदिवासी विकास विभाग उठाता है।
बाल दिवस के अवसर पर जब ये बच्चे पहली बार मुंबई के एनएसई पहुंचे तो उनकी आंखें खुशी से छलक गईं। गरीबी रेखा से नीचे आने वाले इन परिवारों के बच्चे पहली बार मुंबई आए थे। जब वे एनएसई पहुंचे और क्लोजिंग डोर बजाई तब उन्होंने बातचीत में बताया कि आज का दिन उनकी जिंदगी का सबसे यादगार दिन है।
अहमदनगर जिले से आईं कविता भरतडोके ने बताया कि उन्होंने आज तक किसी बड़े शहर के बड़े होटल में खाना नहीं खाया था और न ही कभी कदम रखा था लेकिन यूनिसेफ की इस पहल के बाद उन्हें ये मौका मिला। आदिवासी विकास विभाग की भाग्यश्री ने बताया कि एनएसई में बालदिवस के मौके पर जिस तरह से बच्चों की हौसला अफजाई की गई है वह उनकी जिंदगी में सबसे यादगार पल बन गया है और ये उन्हें आगे बढ़ने में काफी मदद करेगा।
कविता ने बाल दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि वह अपने घर की पहली लड़की हैं जो 12वीं की पढ़ाई कर रही है, सरकार को आदिवासी समुदाय की शिक्षा के लिए कारगर कदम उठाने की जरूरत है। कविता अपना करियर आर्मी में बनाना चाहती हैं। वहीं प्रसाद माणी राज्य स्तर का एथलीट है और 500 मीटर दौड़ में महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।
प्रसाद ने कहा कि आज का दिन हमारे लिए बहुत ही खास है। इन बच्चों ने किड्स टेक ओवर (#KidsTakeOver) के नाम से यूनिसेफ के इस इनीशिएटिव का हिस्सा एनएसई भी बना जहां बच्चों ने सीईओ विक्रम लिमये के साथ इस बेल को बजाया और पूरी बिल्डिंग घूमे और अपनी बातें रखीं। इस मौके पर राज्य के करीब 30 बच्चे एनएसई पहुंचे थे इस कार्यक्रम का संचालन भी इन्हीं बच्चों ने किया। कविता डोके, रानी लालू जाधव, प्रसाद माणी और अनिल दुधौड़े खुद को लकी मान रहे हैं।