भारतीय सेना के आधुनिकीकरण के लिए हो रही रक्षा उपकरणों व हथियारों की खरीद पर रक्षा बजट में हुई मामूली वृद्धि का असर पड़ सकता है। शनिवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020-21 में भारतीय सेना के तीनों अंगों के लिए 3.37 करोड़ रुपये का बजट प्रस्ताव रखा। यह वर्ष 2019-20 में किए प्रावधान से जहां 5.8 प्रतिशत अधिक है, वहीं संशोधित अनुमान के मुकाबले इसमें केवल 1.9 प्रतिशत ही वृद्धि दर्ज की गई है।
रक्षा बजट में मिले 3.37 लाख करोड़ रुपये में से करीब 1.18 लाख करोड़ यानी 35 प्रतिशत राशि ही शुद्ध रूप से आयुध, सैन्य उपकरणों, साजो सामान, आदि की खरीद, रिपेयर व देखरेख पर खर्च होंगे। इसी में आधुनिकीकरण भी होगा। रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाली सेवाओं, संगठनों और विभागों द्वारा यह खर्च किए जाएंगे। बीते बजट अनुमान में यह राशि 1.08 लाख करोड़ थी, जो संशोधित अनुमान में 1.15 करोड़ कर दी गई। यानी इस वर्ष बजट अनुमान से 10 हजार करोड़ और संशोधित अनुमान से तीन हजार करोड़ रुपए के करीब इजाफा ही हुआ है।
वित्त वर्ष 2020-21 में बाकी 2.19 लाख करोड़ रुपये यानी 65 प्रतिशत सेना के वेतन-भत्तों व अन्य ढांचागत कार्यों पर खर्च होंगे। इसका असर कई प्रकार की रक्षा खरीद पर असर हो सकता है। खुद रक्षामंत्री रह चुकीं सीतारमण ने अपने भाषण में रक्षा बजट पर जिक्र नहीं किया। दूसरी ओर 2019-20 के बजट में रक्षा बजट 7.9 प्रतिशत बढ़ाया गया था। ऐसे में सेना के तीनों अंगों द्वारा की जा रही खरीद और आधुनिकीकरण में नव गठित चीफ और डिफेंस स्टाफ के पद केजरिए कड़े समन्वय की जरूरत होगी।
इन पर असर की आशंका
थल सेना : एम777 अल्ट्रा लाइट होवित्जर, के-9 वज्र सेल्फ प्रोपेल्ड गन, भारत द्वारा ही विकसित धनुष होवित्जर।
वायु सेना : राफेल फाइटर जेट और एस400 एयर डिफेंस सिस्टम
नौ सेना : 2027 तक 200 वारशिप खरीद की योजना