मुख्यमंत्री के हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असोम (स्व.) के प्रमुख परेश बरुआ को एक अभूतपूर्व निमंत्रण दिया है। उनकी यात्रा के दौरान सुरक्षित मार्ग के आश्वासन के साथ के राज्य में एक सप्ताह बिताने का न्यौता दिया। स्वतंत्रता दिवस से पहले असम के मुख्यमंत्री की इस पहल को शांति बहाली की दिशा में लिया गया एक अहम कदम माना जा रहा है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बरुआ को एक "बौद्धिक और शिक्षित व्यक्ति" बताते हुए उम्मीद जताई कि उल्फा (स्व.) नेता शांतिपूर्ण चर्चा में शामिल होने के उनके निमंत्रण को स्वीकार करेंगे। सरमा ने कहा, अगर वह वापस आते हैं और इस नए असम में सात दिन रुकते हैं, तो उन्हें समझ आएगा कि यह नया असम पहले से बहुत बदल गया है। परेश बरुआ के लिए परिवर्तन को प्रत्यक्ष रूप से देखने और बदली हुई गतिशीलता को समझने का अवसर मिलेगा। अगर वह 7-10 दिनों के लिए असम में रहेंगे, तो वह खुद असम की स्थिति और माहौल को समझेंगे।
उग्रवाद के मुद्दे पर सरमा ने स्वीकार किया कि उल्फा (आई) जैसे संगठनों में शामिल होने वाले कई लोग अब मुख्यधारा में लौटने का रास्ता तलाश रहे हैं। उन्होंने उनकी वापसी को सुविधाजनक बनाने की अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दिया। सरमा ने कहा कि हालांकि चर्चाएं पहले ही हो सकती थीं, लेकिन किसी भी ठोस प्रगति से पहले कुछ मुद्दों के समाधान की जरूरत है। उन्होंने इन मुद्दों के समाधान और राज्य में शांति बहाल करने को लेकर आशा व्यक्त की।
उल्फा (आई) को मुख्य धारा में शामिल कराने की कोशिश काफी समय से चल रही है। जानकार इसे एक अच्छी पहल मान रहे हैं। वे इसे स्वतंत्रता दिवस से पहले मुख्यमंत्री का उल्फा (आई) के प्रमुख को दिया गया न्यौता शांति बहाली की दिशा में उठाए जा रहे क्रम में, एक अलगी कड़ी मान रहे हैं।