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बिहार के नेता नंबर वन बने रहना चाहते हैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

Wed, 05 Jun 2019 06:14 PM IST
शशिधर पाठक शशिधर पाठक, नई दिल्ली
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो)
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बिहार में सारी लड़ाई नेता नंबर एक बनने की है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पिछले डेढ़ दशक से राज्य में राज कर रहे हैं। सुशासन बाबू हैं। 2015 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की छवि के आगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का कोई प्रबंधन नहीं चल पाया था। नीतीश कुमार फिलहाल अपनी इस साख से कोई समझौता नहीं करना चाहते। वह भाजपा के नेताओं की महत्वाकांक्षा को भी बारीकी से समझ रहे हैं। यही वजह है कि रोजा इफ्तार पार्टी की तस्वीरों पर तंज कसने के बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को जमकर आड़े हाथों लिया।

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नीतीश कुमार की निष्पक्ष और धर्म निरपेक्ष छवि बनाए रखने में जद(यू) के नेताओं ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। केसी त्यागी से लेकर आरसीपी सिंह सबने अपने नेता का साथ दिया। सबसे दिलचस्प रहा कि जिस महागठबंधन को छोड़कर नीतीश कुमार ने भाजपा का फिर से दामन पकड़ा था, उसी महागठबंधन के नेता नीतीश कुमार को निमंत्रण देते नजर आए। राजनीति के जानकारों का मानना है कि इस प्रकरण के बहाने नीतीश कुमार ने अपनी ठसक का भी परिचय दे दिया है। उन्होंने संदेश दे दिया कि अभी वह चुके नहीं है। बिहार में नीतीश कुमार और जद(यू) का अलग महत्व है। 

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अमित शाह सब समझते हैं

भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री अमित शाह इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम को अच्छी तरह से समझते हैं। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता की मानें तो शाह इसका मूल्यांकन भी कर रहे हैं। अमित शाह का शुक्लपक्ष यह है कि वह मुगालते में नहीं रहते। उन्हें अपना उद्देश्य और आगे क्या करना है दोनों अच्छी तरह से हमेशा पता रहता है। यही वजह है कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को बयानों में सावधान रहने की सख्त नसीहत दे दी है। एक तरह से यह बड़बोले गिरिराज के लिए आखिरी नसीहत जैसी है। 

भाजपा के पास बिहार में उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी जैसा नेता भी है। सुशील मोदी और नीतीश कुमार के आपसी समीकरण काफी अच्छे हैं। इसलिए भाजपा अध्यक्ष अभी तोलकर चल रहे हैं। बिहार में भाजपा के अध्यक्ष के साथ काम कर चुके एक सूत्र की मानें तो अमित शाह सहयोगी दलों के नेताओं का पूरा आदर करते हैं। पहले रिश्ते में खटास लाने के पक्षधर नहीं होते, लेकिन यदि कोई अलग होना ही चाहे तो उसकी बहुत परवाह भी नहीं करते। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल का चार साल पूरा होने पर नीतीश कुमार के एनडीए में बने रहने को लेकर एक सवाल के जवाब में शाह ने अपनी राय जाहिर की थी। अमित शाह ने कहा था कि जहां उन्हें (नीतीश कुमार) न्यूसेंस वैल्यू कम दिखेगी, नीतीश कुमार उसके साथ रहेंगे।
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