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'कानूनी दुनिया के गलियारों में प्रवेश': तुषार मेहता की किताबों पर CJI सूर्यकांत की सराहना; अमित शाह रहे मौजूद

Sun, 10 May 2026 10:57 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली में आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह में CJI सूर्यकांत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दो किताबों की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि मेहता ने कानून की गंभीर दुनिया में हास्य और मानवीयता का सुंदर मिश्रण पेश किया है।
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गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत - फोटो : PTI
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विस्तार
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राजधानी दिल्ली में रविवार को आयोजित एक विशेष पुस्तक विमोचन समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की लेखनी की जमकर सराहना की। इस मौके पर उनकी दो नई किताबों "द बेंच, द बार, एंड द बिजारे'' और "द लॉफुल एंड द अवफुल" का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी भी मौजूद रहे।

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कानून की गंभीर दुनिया में हास्य का स्पर्श
सीजेआई सूर्यकांत ने अपने संबोधन में तुषार मेहता की लेखनी को 'कानून की गंभीर दुनिया में हास्य और मानवीयता का अनोखा संगम' बताया। उन्होंने कहा कि जब उन्हें इस कार्यक्रम के लिए आमंत्रण मिला तो उन्हें लगा कि कहीं कानून की दुनिया कॉमेडी क्लब में तो नहीं बदल रही है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वे बार-बार यह सोचते रहे कि व्यस्त न्यायिक जीवन के बीच तुषार मेहता ने इन किताबों को लिखने का समय कैसे निकाला।

25वां घंटा या कोर्टरूम की रचनात्मकता?
सीजेआई ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि उनके पास दो संभावनाएं हैं या तो तुषार मेहता ने भगवान से दिन में 25 घंटे का विशेष प्रावधान करा लिया है या फिर उन्होंने कोर्टरूम की लंबी सुनवाईयों के बीच ही हास्य लेखन की कला विकसित कर ली है। उनकी इस टिप्पणी पर पूरे सभागार में हंसी गूंज उठी। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि ये किताबें सिर्फ मजाकिया किस्सों का संग्रह नहीं हैं, बल्कि यह दिखाती हैं कि कानून की कठोर संरचना के भीतर भी इंसानी भावनाएं और हास्य झलकते हैं। उन्होंने कहा कि हर कानूनी दस्तावेज, हर सुनवाई और हर फैसला आखिरकार इंसानों से ही जुड़ा होता है, जिनमें अपनी खूबियां और कमजोरियां दोनों होती हैं।
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'मार्क ट्वेन जैसे न्यायिक किस्से'
सीजेआई ने कहा कि इन किताबों को पढ़ते हुए ऐसा महसूस होता है मानो सुप्रीम कोर्ट का कोई फैसला मार्क ट्वेन ने लिखा हो। उन्होंने कहा कि यह कृतियाँ कानून को बोझ नहीं बल्कि एक रोचक अनुभव बना देती हैं। कार्यक्रम के दौरान सीजेआई ने मजाकिया अंदाज में सुझाव दिया कि तुषार मेहता को भारतीय न्याय व्यवस्था पर भी एक किताब लिखनी चाहिए, क्योंकि यहां हास्यप्रद किस्सों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की अदालतों में ही इतना कंटेंट है कि एक पूरी लाइब्रेरी तैयार हो सकती है।

न्यायपालिका में नाटक और हास्य का संगम
सीजेआई ने कहा कि अदालतें केवल गंभीरता का स्थान नहीं हैं, बल्कि वहां नाटक, तर्क और हास्य का अनोखा संगम भी देखने को मिलता है। जजों और वकीलों के बीच चलने वाली यह प्रक्रिया कभी-कभी बेहद रोचक मोड़ ले लेती है।
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