शनिवार को सार्वजनिक महत्व के एक मुद्दे पर विशेष सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में गठित एक पीठ ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता से जुड़े इस मुद्दे पर सुनवाई की। इस पीठ का गठन उस वक्त किया गया जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीजेआई रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगने के संबंध में अधिकारियों को बताया।
सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से एक नोटिस जारी किया गया जिसमें कहा गया कि एक विशेष पीठ का गठन किया गया है सार्वजनिक महत्व के मुद्दे पर सुनवाई करेगी। सीजेआई गोगोई, न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और संजीव खन्ना की पीठ ने शनिवार सुबह इस मामले की सुनवाई की।
कई जजों को महिला ने भेजी थी चिट्ठी
सुप्रीम कोर्ट के महासचिव संजीव सुधाकर कलगांवकर ने बताया कि महिला द्वारा लगाए गए सभी आरोप दुर्भावनापूर्ण और निराधार हैं। उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि ये दुर्भावनापूर्ण आरोप हैं और इस पर सुनवाई अभी होगी। सीजेआई पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली महिला ने कई जजों को चिट्ठी भेजी है। संजीव सुधाकर ने भी इस बात की पुष्टि की।
वहीं, न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा ने कहा कि न्यायिक प्रणाली में लोगों के विश्वास को देखते हुए हम सभी न्यायपालिका की स्वंतत्रता को लेकर चिंतित हैं। इस तरह के अनैतिक आरोपों से न्यायपालिका पर से लोगों का विश्वास डगमगाएगा।