मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एसए बोबडे सुप्रीम कोर्ट में किसी जज की नियुक्ति की सिफारिश किए बगैर ही सेवानिवृत्त हो जाएंगे। करीब 18 महीने तक मुख्य न्यायाधीश रहने के बावजूद सीजेआई बोबडे की अध्यक्षता वाली कॉलेजियम सुप्रीम कोर्ट के लिए एक भी जज के नाम की सिफारिश करने में असफल रही।
शुक्रवार को जस्टिस बोबडे का आखिरी कार्य दिवस है। जानकारी के मुताबिक, अब तक ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है कि शुक्रवार को कॉलेजियम की बैठक होनी है।
जस्टिस बोबडे ने नवंबर, 2019 में सीजेआई का पद ग्रहण किया था। 18 महीने के कार्यकाल में वह बमुश्किल चार महीने ही कोर्टरूम सुनवाई कर सके। कोरोना के कारण पिछले एक वर्ष से अधिक समय से वर्चुअल सुनवाई हुई। कॉलेजियम की अधिक बैठकें न होने की वजह कोरोना महामारी भी रही।
गत आठ अप्रैल को कॉलेजियम की बैठक भी हुई थी लेकिन कॉलेजियम के सदस्यों के बीच किसी भी नाम पर सहमति नहीं बन सकी। कॉलेजियम की हुई इस बैठक से पूर्व सुप्रीम कोर्ट के कुछ जजों ने आपत्ति भी जताई थी।
सुप्रीम कोर्ट के कुछ जजों का मानना था कि चूंकि जस्टिस एनवी रमना को देश का अगला मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की अधिसूचना जारी कर दी गई है, ऐसे में चीफ जस्टिस बोबडे को कॉलेजियम की बैठक नहीं करनी चाहिए। ऐसी परंपरा रही है लेकिन बैठक करने पर कोई पाबंदी नहीं है। हालांकि, बैठक बेनतीजा रही।
अगले सीजेआई रमना के लिए भी जजों की नियुक्ति प्राथमिकता में
जस्टिस बोबडे से पहले चीफ जस्टिस रहे जस्टिस रंजन गोगोई ने अपने कार्यकाल के दौरान 14 जजों की नियुक्ति की। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट में स्वीकृत जजों की संख्या 34 है लेकिन फिलहाल 29 जज ही हैं। ऐसे में अगले मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना के लिए जजों की नियुक्ति भी उनकी प्राथमिकताओं में से एक होगी।