विपक्ष लगातार विधानसभा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर वोटर लिस्ट में हेरफेर करने का आरोप लगा रहा है। ऐसे में वोटर लिस्ट और ईवीएम पर उठाए गए सवालों पर मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि ये सारे आरोप निराधार हैं। हमेशा सूची में कुछ नामों को जोड़ा जाता है और कुछ को हटाया जाता है। वोटर हटाने पर पूरी प्रक्रिया का पालन होता है। राजनीतिक दलों की सहमति से ही वोटर लिस्ट अपडेट होती है।
'ईवीएम से छेड़छाड़ की बात में दम नहीं'
उन्होंने कहा कि ईवीएम से छेड़छाड़ की बात में दम नहीं है। कोर्ट ने माना है कि ईवीएम हैक नहीं हो सकती, लेकिन ईवीएम पर शक जताने की कोशिश की गई। चुनाव से सात-आठ दिन पहले ईवीएम तैयार हो जाती है। एजेंट के सामने ईवीएम सील होती है। मतदान के बाद ईवीएम सील की जाती है। ईवीएम में अवैध वोट की संभावना नहीं है। प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी है।
कैसे हट सकता है किसी वोटर्स का नाम?
अब सवाल ये है कि किसी वोटर का नाम चुनाव लिस्ट से कैसे हट सकता है। बता दें कि मतदाता सूची से नाम हटाना की प्रक्रिया ईसीआई द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार सख्ती से की जाती है। इसके लिए आवेदक को फॉर्म 7 दाखिल करना होता है। इतना ही नहीं नाम हटाने की प्रकिया में बूथ लेवल ऑफिसर (BLP), बीएलओ पर्यवेक्षकों और अन्य अधिकारियों द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार गहन फील्ड सत्यापन किया जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि नाम हटाने के लिए सूची जमा करने से नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू नहीं होती है।
आयोग आवेदन कर सकता है खारिज
बता दें कि चुनाव आयोग नामों को हटाने के लिए आवेदन को खारिज कर सकता है। दरअसल फॉर्म सात आवेदनों को उचित प्रक्रिया और फील्ड सत्यापन के बाद खारिज किया जाता सकता है। क्योंकि प्रत्येक आवेदन की व्यक्तिगत रूप से जांच की जाती है और यदि वह अमान्य पाया जाता है तो उसे योग्यता के आधार पर खारिज कर दिया जाता है।
मृतक के नाम हटाने का आवेदन
बता दें कि अगर किसी व्यक्ति की मौत होती है, तो उसका नाम वोटर लिस्ट से हटाने के लिए भी फॉर्म सात भरता होता है। इसके बाद बूथ लेवल ऑफिसर इसका सत्यापन करते हैं कि व्यक्ति की मृत्यु कब हुई है। जिसके बाद वो उस व्यक्ति को मृत घोषित करके फाइल आगे बढ़ा देते हैं। अगर इस दौरान उन्हें सही जानकारी नहीं मिलती है, तो आवेदन रद्द कर दिया जाता है।