कृषि क्षेत्र के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस समय कृषि उत्पादन कोई बड़ी समस्या नहीं है। कृषि उपज की अंतिम उपभोक्ता तक ज्यादा से ज्यादा पहुंच सुनिश्चित करना एक समस्या है।
उनका संकेत इस ओर था कि किसान जितनी फल-सब्जी उगाते हैं, उसमें से काफी मात्रा खराब हो जाती है। इसी तरह भंडारण सुविधा का उचित प्रबंध नहीं होने से किसानों को उपज की सही कीमत नहीं मिल पाती। इसलिए सरकार अब इस ओर ध्यान दे रही है। यह पूछे जाने पर कि खेतीबाड़ी क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों की संख्या घटी है, तो उन्होंने कहा, इस क्षेत्र का भी मशीनीकरण हो रहा है, इसलिए श्रमिकों की अब उतनी मांग नहीं रही जितनी पहले होती थी।
निवेशकों के आने से बढ़ रहा शेयर बाजार
शेयर बाजार के सूचकांक के शीर्ष पर पहुंचने और इसका बुलबुला कभी भी फटने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस समय घरेलू निवेशकों के समक्ष निवेश के ज्यादा विकल्प रह नहीं गए हैं। उन्हें सोना या रियल एस्टेट में उचित प्रतिफल मिल नहीं मिल रहा है। इसलिए वे शेयर बाजार में प्रवेश कर रहे हैं, लिहाजा सूचकांक भी बढ़ रहा है। लेकिन ऐसी कोई बात नहीं है कि यह बुलबुला फट जाएगा।