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Energy Connectivity: पड़ोसियों के साथ उर्जा संबंध साबित होंगे गेम चेंजर, गुवाहाटी में बोले हर्षवर्धन श्रृंगला

Sun, 20 Nov 2022 07:19 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी

सार

भारत के जी20 अध्यक्षता के मुख्य समन्वयक हर्षवर्धन श्रृंगला ने पड़ोसी देशों के साथ उर्जा कनेक्टिविटी पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि हम हाल ही में सीमा पार ऊर्जा व्यापार नीति लेकर आए हैं। इस नीति के तहत भारत और बांग्लादेश में गलियारों के माध्यम से बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और भारत के बीच बिजली का व्यापार किया जा सकता है।  
 
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हर्षवर्धन श्रृंगला - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत के जी20 अध्यक्षता के मुख्य समन्वयक हर्षवर्धन श्रृंगला ने पड़ोसी देशों के साथ उर्जा कनेक्टिविटी पर जोर दिया है। उन्होंने रविवार को गुवाहाटी में कहा कि पड़ोसी देशों के साथ ऊर्जा संपर्क और व्यापार भारत के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। उन्होंने अपने संबोधन में पूर्वोत्तर क्षेत्र और दक्षिण पूर्व एशिया के समग्र विकास को बढ़ावा देने में सांस्कृतिक और लोगों के बीच संपर्क की भूमिका पर भी जोर दिया। 

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राष्ट्र के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र के योगदान पर यहां दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन पर बोलते हुए श्रृंगला ने कहा कि एक बहुपक्षीय समझौते के अनुसार बांग्लादेश के रास्ते संकीर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर के माध्यम से विद्युत पारेषण लाइनों का डी-कंजेशन, विशेष रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्र को लाभान्वित करेगा। आगे बोलते हुए उन्होंने कहा कि हम हाल ही में सीमा पार ऊर्जा व्यापार नीति लेकर आए हैं। इस नीति के तहत भारत और बांग्लादेश में गलियारों के माध्यम से बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और भारत के बीच बिजली का व्यापार किया जा सकता है।  

उन्होंने कहा कि इस नीति के कारण ही निजी क्षेत्र ने नेपाल में महत्वपूर्ण निवेश किया है। जिसके कारण पड़ोसी देश अब भारत को बिजली निर्यात कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि इससे भविष्य में क्षेत्रीय संबंधों का स्वरूप बदलेगा। दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने आगे कहा कि भारत ने पिछले दशक की शुरुआत में बांग्लादेश को बिजली बेचना शुरू किया था। उस समय बांग्लादेश ऊर्जा संकट से जूझ रहा था। तब से अब आपूर्ति बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि भारत बुनियादी ढांचे में निवेश करके अपने पड़ोस के समग्र विकास में मदद कर रहा है।  
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पूर्व विदेश सचिव श्रृंगला इस दौरान पूर्वोत्तर क्षेत्र से अतिरिक्त बिजली निकालने के लिए पारेषण लाइनों की भीड़भाड़ को कम करने की आवश्यकता के साथ ही पश्चिम बंगाल में सिलीगुड़ी के माध्यम से नैरो कॉरिडोर की जरूरत पर भी प्रकाश डाला। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में सिलीगुड़ी के माध्यम से संकीर्ण गलियारे जो पूर्वोत्तर के राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है, को 'चिकन की गर्दन' कहा जाता है।

उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर से अतिरिक्त बिजली को शेष भारत में ले जाया जा सकता है और बांग्लादेश को भी आपूर्ति की जा सकती है। उन्होंने कहा कि बेहतर सीमा अवसंरचना और अधिक आर्थिक संपर्क को सुविधाजनक बनाने वाली नीतियों के कारण सीमावर्ती देशों के साथ व्यापार संबंधों में सुधार हुआ है। इन नीतियों के फलस्वरूप पड़ोसी देशों के साथ व्यापार में बढ़ोतरी हुई है, जो पूर्वोत्तर के लिए एक बड़ा और प्रत्यक्ष बाजार सुनिश्चित करेगी। 

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