कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने केंद्र सरकार और वित्त मंत्री अरुण जेटली पर तीखा हमला करते हुए पूछा है कि क्या लाखों लोगों को मुसीबतों के पहाड़ के नीचे दबा देना नैतिकता है।
एक के बाद एक कई ट्विट में उन्होंने जेटली के उस बयान को आड़े हाथ लिया है जिसमें उन्होंने कहा है कि नोटबंदी का फैसला नैतिकता और सिद्धांत पर आधारित था।
चिदंबरम ने अपने पोस्ट में लिखा है कि इससे कोई इनकार नहीं कर सकता कि नोटबंदी के कारण लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा और कई लोगों की तो जान ही चली गई।
वित्त मंत्री कहते हैं कि यह एक नैतिक फैसला था लेकिन लोगों को कष्ट पहुंचना भला कहां की नैतिकता है। क्या 15 लाख रोजगार छीनना नैतिक था? क्या हजारों छोटे एवं मझोले उद्योगों को बंद करना नैतिक था?
क्या काले धन को सफेद करने का मौका देना नैतिक था? क्या सूरत, भिवंडी, मुरादाबाद, आगरा, लुधियाना और तिरुपुर के तेजी से बढ़ते औद्योगिक हब को नष्ट करना नैतिक था?
इसके मद्देनजर पारदर्शिता की तकाजा है कि नोटबंदी को लेकर रिजर्व बैंक के निदेशक बोर्ड का एजेंडा, बैकग्राउंड नोट और पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का नोट सार्वजनिक किया जाए।
उन्होंने अपने ट्विट में कहा है कि बीबीसी के अनुसार नोटबंदी के भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है तो क्या मोदी सरकार की नजर में क्या बीबीसी भी काले धन और भ्रष्टाचार का समर्थक है?
उन्होंने मोदी सरकार के इस दावे को गलत बताया कि उसके इस फैसले के कारण नकदी में कमी आई है। आप देखेंगे कि जल्दी ही नकदी की स्तर नवंबर, 2016 के स्तर पर पहुंच जाएगा।