छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव भले ही 2023 के नवंबर-दिसंबर में है, लेकिन राज्य में चुनावी सरगर्मियां तेज हो चली है। पिछले दो माह से सूबे के मुखिया भूपेश बघेल राज्य की 90 विधानसभा सीटों की दौरा कर वहां सियासी नब्ज टटोल रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ अब भाजपा भी बघेल को मात देने में जुट गई है। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश भाजपा के नेताओं को विधानसभा और संसदीय क्षेत्र के कमजोर बूथ की पहचान करे उसे दुरुस्त करने की हिदायत दी है।
अमर उजाला से चर्चा में छत्तीसगढ़ से भाजपा सांसद सुनील सोनी ने कहते हैं कि पार्टी हाईकमान के निर्देश पर संसदीय क्षेत्रों के कमजोर बूथों की पहचान कर उन्हें मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। यह हमारी पार्टी की रूटीन प्रक्रिया है। भाजपा 24 घंटे 12 माह काम करने वाली पार्टी है। यहां इस तरह के कार्यक्रम हर दिन चलते रहते हैं। पिछले एक माह से मैं अपने क्षेत्र के कमजोर बूथों में जाकर कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रहा हूं और स्थानीय लोगों से बात कर रहा हूं। इस दौरान लोगों को केंद्र मोदी सरकार की योजनाओं के बारे भी बताया जा रहा है।
केंद्रीय नेतृत्व चुनावी मोड में
हाल ही में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व और संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने दिल्ली में छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ भाजपा नेताओं की बैठक ली थी। इसमें प्रदेश के संघ से जुड़े पदाधिकारी शामिल हुए थे। बैठक के बाद मीडिया से चर्चा में प्रदेश के पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह ने कहा था कि ऐसे राज्य जहां भाजपा की सरकार नहीं है या फिर वहां भाजपा की स्थिति ठीक नहीं है, उन राज्यों में बेहतर प्रदर्शन के लिए रणनीति बनाई गई है। अमर उजाला से चर्चा में छत्तीसगढ़ भाजपा के सूत्रों ने कहा कि छत्तीसगढ़ में साल 2023 के नवंबर-दिसंबर में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। पिछले चुनावों के कड़वे अनुभवों को देखते हुए केंद्रीय नेतृत्व अभी से चुनावी मोड में आ गया है। पार्टी ने सभी सांसदों और विधायकों को कमजोर बूथ को मजबूत करने का निर्देश दिया है। इसकी रिपोर्ट हर माह प्रदेश भाजपा कार्यालय को दी जाएगी। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष इसकी समीक्षा करेंगे। इस रिपोर्ट को केंद्रीय नेतृत्व और संघ के नेताओं को भी सौंपी जाएगी।
राज्य की कुछ योजनाओं के केंद्र से मिल चुका है पुरस्कार
सूत्र ने कहा कि लगातार पंद्रह सालों तक सत्ता में रहने वाली पार्टी 2018 की हार को भुलाते हुए 2023 में सत्ता में वापसी करना चाहती है, जिसकी तैयारी अभी से शुरू हो चुकी है। पार्टी की यह कवायद उसे संगठनात्मक रूप से मजबूती देगी, जिसका लाभ आने वाले दिनों में मिल सकता है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि केंद्र सरकार की योजनाओं के सहारे राज्य की सत्ता में वापसी की कवायद पार्टी कर रही है। यह कार्यक्रम इसलिए भी तेजी से चलाया जा रहा है क्योंकि प्रदेश के सीएम बघेल इन दिनों 90 विधानसभा सीटों का दौर कर रहे हैं। वे लगातार कांग्रेस सरकार की योजनाओं को लोगों के बीच ले जा रहे हैं। कई अहम योजनाएं प्रदेशवासियों के बीच बेहद लोकप्रिय भी हैं। जबकि कुछ योजनाओं को केंद्र सरकार से पुरस्कार भी मिल चुका है। ऐसे में भाजपा के पास दोहरी चुनौती है। पहली की बघेल की बढ़ती लोकप्रियता को रोकना और दूसरा मोदी सरकार के काम और योजनाएं को आम लोग पहुंचना, जिसका फायदा पार्टी को चुनाव में मिल सके। इन्हीं सभी को ध्यान में रखते हुए यह कार्यक्रम शुरू किए गए हैं।
कांग्रेस की तरफ से बघेल ने संभाल रखा है जिम्मा
भाजपा भले ही अभी से मिशन 2023 में जुट गई हो, मगर छत्तीसगढ़ में सत्ताधारी दल कांग्रेस इसे बेफिजूल मेहनत करार दे रही है। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि भाजपा अभी कितना भी दम लगा ले, कोई भी योजना बना ले, छत्तीसगढ़ की जनता कांग्रेस के साथ है। इस बार भी जनता उनका ही साथ देगी। कांग्रेस पार्टी की तरफ से पूरा मोर्चा सीएम बघेल ने संभाल रखा हैं। वे लगातार राज्य का दौरा कर रहे हैं और उनकी लोकप्रियता भी लगातार बढ़ती जा रही है।