भारतीय नागरिकता अधिनियम के अनुसार, भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति को आवेदन की तारीख से कम से कम 12 महीने पहले भारत में उपस्थित होना चाहिए।
यह था आरोप
उनके खिलाफ चुनाव लड़ने वाले एक स्थानीय नेता आदि श्रीनिवास ने गृह मंत्रालय को यह कहते हुए शिकायत की कि रमेश अभी भी जर्मन पासपोर्ट रखते हैं और भारतीय नागरिकता प्रदान करने से पहले 12 महीने की इस निर्धारित अवधि के भीतर जर्मनी चले गए थे।
गृह मंत्रालय द्वारा नियुक्त एक समिति ने कहा कि रमेश ने भारत सरकार के खिलाफ धोखाधड़ी करके और पिछले बारह महीनों के दौरान अपनी विदेश यात्रा के महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी। जिसके बाद सितंबर 2017 में गृह मंत्रालय ने उनकी नागरिकता रद्द कर दी।
नागरिकता रद्द होने के बाद चिन्नमनेनी रमेश ने गृह मंत्रालय में एक समीक्षा याचिका दायर की और हाईकोर्ट से स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया। इसके बाद दिसंबर 2018 में तेलंगाना में फिर से विधानसभा चुनाव लड़ा और लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए उसी निर्वाचन क्षेत्र से विधायक चुने गए।
हाईकोर्ट ने जुलाई में इस मामले को गृह मंत्रालय के पास भेज दिया था जिसके बाद बुधवार को फिर से उनकी नागरिकता रद्द करने का आदेश जारी किया गया। हालांकि रमेश ने अपने बयान में कहा है कि वह फिर से कोर्ट का रूख करेंगे और अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।