तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) पार्टी के प्रमुख और अभिनेता विजय को रविवार को उनके चेन्नई स्थित आवास पर बम की धमकी मिली। इसके बाद उनके आवास पर व्यापक तलाशी के लिए खोजी कुत्तों के साथ एक बम निरोधक दस्ता तैनात किया गया है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब 27 सितंबर को करूर में विजय की रैली के दौरान मची भगदड़ में 40 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 60 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से कम से कम दो की हालत गंभीर बनी हुई है।
घर के बाहर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
बम की धमकी मिलने की सूचना मिलते ही बम निरोधक दस्ता और स्निफर डॉग के साथ पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे परिसर की गहन तलाशी ली। बता दें कि शनिवार को हुई घटना के बाद से एक्टर विजय के घर की सुरक्षा को कड़ा कर दिया गया है। उनके घर के आसपास भारी संख्या में पुलिसबल तैनात है।
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टीवीके के तीन नेताओं पर केस
टीवीके प्रमुख की रैली में हुई भगदड़ के मामले में पार्टी के तीन नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इनमें टीवीके महासचिव एन आनंद उर्फ बुस्सी आनंद, पार्टी के करूर जिला सचिव मथिझागन और पार्टी के संयुक्त महासचिव निर्मल कुमार के नाम आरोपियों के रूप में शामिल हैं। हाईकोर्ट की सेवानिवृत्त जस्टिस अरुणा जगदीशन की एक सदस्यीय न्यायिक आयोग ने घटना की जांच शुरू कर दी है। वह रविवार को करूर के वेलुसामीपुरम में घटना स्थल पहुंचीं और अधिकारियों से बात की।
भगदड़ में मरने वालों की संख्या 40 हो गई है, रविवार को अस्पताल में एक व्यक्ति ने दम तोड़ दिया। राज्य के पुलिस महानिदेशक जी वेंकटरमण ने कहा कि अभिनेता विजय रैली स्थल पर तय समय से बहुत देर से पहुंचे, कड़ी धूप में लंबे इंतजार से भूख-प्यास और थकान के कारण कुछ लोग बेहोश हो गए और टीवीके कार्यकर्ताओं के सहयोग की कमी के कारण यह दुखद हादसा हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि रैली स्थल पर पर्याप्त भोजन और पानी की भी व्यवस्था नहीं थी।
वहीं, करूर जिले के कलेक्टर एम थंगवेलु ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी-कानून और व्यवस्था) एस डेविडसन देवसिरवथम के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अभिनेता के आने में देरी की वजह से रैली स्थल पर भीड़ बढ़ती गई। 20,000 लोगों के जुटने के हिसाब से पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए थे, लेकिन भीड़ बहुत अधिक हो गई। एडीजीपी ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था में टीवीके कार्यकर्ताओं के सहयोग की कमी भी हादसे की वजह बनी। थंगवेलु ने इस आरोपों को गलत बताया कि सरकार के दबाव में रैली स्थल को बदल दिया गया। उन्होंने रैली में पथराव के आरोपों को भी गलत बताया।
एडीजीपी देवसिरवथम ने रैली के लिए सुरक्षा व्यवस्था में कमी के आरोपों से भी उन्होंने इन्कार किया। उन्होंने बताया कि रैली में सुरक्षा के लिए 500 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे, जिनमें एक पुलिस अधीक्षक, 3 अतिरिक्त एसपी, 4 डीएसपी, 7 इंस्पेक्टर, 58 सब-इंस्पेक्टर शामिल थे। एक दिन पहले इसी स्थल पर एक राजनीतिक दल की इससे बड़ी रैली की सुरक्षा में मात्र 120 पुलिसकर्मी लगाए थे।