Delimitation: तमिलनाडु में परिसीमन के मुद्दे को लेकर तमाम दल एक साथ नजर आ रहे हैं। एक तरफ से जहां सीएम स्टालिन इसका खुलकर विरोध कर रहे हैं, वहीं टीवीके प्रमुख विजय के बाद अब नेता-अभिनेता कमल हासन ने भी इसका विरोध जताया है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की अध्यक्षता में परिसीमन मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक में शामिल के बाद अभिनेता और मक्कल निधि मैयम प्रमुख कमल हसन रवाना ने कहा, 'मेरी राय है कि इन 453 (सीटों) में बदलाव की जरूरत नहीं है'। उन्होंने आगे कहा- 'जब देश की जनसंख्या 145 करोड़ थी, तब भी इन 453 सदस्यों ने देश को आज इस स्थिति तक पहुंचाया...ये पर्याप्त हैं। अगर उन्हें सीटों की संख्या बढ़ानी ही है, तो केंद्र में लिए गए सभी सरकारी फैसले राज्यों द्वारा निष्पादित किए जाते हैं। अगर वे जनप्रतिनिधियों की संख्या बढ़ाना ही चाहते हैं, तो विधानसभा की सीटें बढ़ाई जानी चाहिए'।
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टीवीके प्रमुख विजय ने भी जताया ऐतराज
राज्य में परिसीमन को लेकर जारी विवाद पर अब फिल्म अभिनेता और तमिल वेत्री कषगम (टीवीके) के प्रमुख विजय दलपति ने भी टिप्पणी की हैं। विजय दलपति ने सोशल मीडिया पर इसे लेकर बयान जारी किया है। इस बयान में विजय ने लिखा है कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होता है तो ये दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक अहमियत कम करने की कोशिश होगी। उन्होंने लिखा कि 'अगर केंद्र सरकार मनमाने तरीके से संसदीय सीटों का परिसीमन करती है तो इसे दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक अहमियत कम करने के तौर पर देखा जाएगा। इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस अहम मुद्दे पर हम सभी एक हैं और इससे ये भी पता चलेगा कि कौन तमिलनाडु के कल्याण के साथ है और कौन तमिलनाडु के खिलाफ।'
अगले साल से शुरू होनी है परिसीमन
साल 2026 से परिसीमन की प्रक्रिया शुरू होनी है। अगर परिसीमन जनसंख्या के आधार पर हुआ तो इससे दक्षिण के राज्यों में लोकसभा सीटें घट सकती हैं और उत्तरी राज्यों में सीटें बढ़ सकती हैं। इसका दक्षिण के राज्य विरोध कर रहे हैं। हालांकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने साफ किया है कि परिसीमन से दक्षिण के राज्यों को नुकसान नहीं होगा। वहीं सीएम स्टालिन ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण करने के लिए दक्षिणी राज्यों को सजा दी जा रही है।