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CBI Court: 22 साल पुराने मामले में अंडर वर्ल्ड डॉन छोटा राजन को सात साल की सजा, कैसे हुआ मामले का खुलासा?

Thu, 30 Jul 2026 06:40 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट हासिल करने के 22 साल पुराने मामले में विशेष सीबीआई अदालत ने सात साल की सजा सुनाई है। जांच में सामने आया कि उसने फर्जी पहचान और नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था। आखिर यह मामला कैसे शुरू हुआ, सीबीआई की जांच में क्या खुलासा हुआ और अदालत ने क्या फैसला सुनाया? आइए, सबकुछ विस्तारे से जानते हैं...
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छोटा राजन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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चेन्नई की विशेष सीबीआई अदालत ने अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट हासिल करने के मामले में सात साल के कारावास की सजा सुनाई है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। यह मामला करीब 22 साल तक अदालत में चला। सीबीआई के अनुसार, छोटा राजन ने अपनी असली पहचान छिपाकर दूसरे नाम से पासपोर्ट बनवाया था और इसके लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था।
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सीबीआई के मुताबिक, छोटा राजन ने 'विजया कदम' नाम से पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था। आवेदन के साथ उसने स्कूल का ट्रांसफर सर्टिफिकेट, राशन कार्ड और अन्य दस्तावेज जमा किए थे, जो जांच में फर्जी पाए गए। एजेंसी ने बताया कि जांच के दौरान यह भी सामने आया कि 'विजया कदम' के नाम से पासपोर्ट लेने वाला व्यक्ति वास्तव में मुंबई निवासी राजेंद्र उर्फ नाना उर्फ छोटा राजन था। अदालत ने इन्हीं तथ्यों के आधार पर उसे दोषी ठहराते हुए सात साल की सजा सुनाई।

मामले की जांच कब और कैसे शुरू हुई?

सीबीआई ने बताया कि इस मामले में 19 मार्च 2002 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोप था कि आरोपी ने फर्जी दस्तावेज जमा कर चेन्नई के क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय को धोखा दिया और भारतीय पासपोर्ट हासिल कर लिया। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद एजेंसी ने मामले की जांच शुरू की और दस्तावेजों की जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए।

जांच में क्या-क्या खुलासा हुआ?

सीबीआई की जांच में पाया गया कि पासपोर्ट के लिए इस्तेमाल किए गए दस्तावेज वास्तविक नहीं थे। आरोपी ने अपनी असली पहचान छिपाने के लिए दूसरे नाम का इस्तेमाल किया और फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर सरकारी रिकॉर्ड में गलत जानकारी दर्ज कराई। एजेंसी ने जांच पूरी करने के बाद 22 जनवरी 2004 को अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया था। इसके बाद लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया चली और आखिरकार अदालत ने फैसला सुनाया।

छोटा राजन अभी कहां है?

सीबीआई के प्रवक्ता ने बताया कि छोटा राजन फिलहाल नई दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है। वह पहले से ही दूसरे मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। अब फर्जी पासपोर्ट मामले में उसे सात साल की अतिरिक्त सजा भी सुनाई गई है। यह फैसला लंबे समय से लंबित इस मामले में सीबीआई के लिए एक अहम कानूनी सफलता माना जा रहा है।

22 साल बाद क्यों आया फैसला?

यह मामला वर्ष 2002 में दर्ज हुआ था और वर्ष 2004 में आरोपपत्र दाखिल कर दिया गया था। इसके बाद अदालत में सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया जारी रही। करीब 22 साल बाद विशेष सीबीआई अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के आधार पर छोटा राजन को दोषी ठहराते हुए सात साल के कारावास की सजा सुनाई। अदालत के फैसले के साथ इस लंबे समय से चल रहे मामले का निपटारा हो गया।
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