रिसर्च फर्म इप्सोस द्वारा किए गए एक सर्वे के अनुसार 40 फीसदी भारतीय चाहते हैं कि देश में सिगरेट, ई-सिगरेट और गांजा जैसे मादक पदार्थों पर रोक लगे। यह तथ्य इसलिए बेहद जरूरी है क्योंकि देश की 14.6 फीसदी आबादी नशे की आदी है, वहीं पंजाब हर तरह के नशे के मामले में सबसे आगे है।
साल 2016 में आई फिल्म 'उड़ता पंजाब' पंजाब में नशे के कारोबाक पर आधारित थी। जब यह फिल्म आई थी तो काफी बवाल हुआ था। हालांकि वस्तु स्थितियों में अब काफी परिवर्तन आया है, लेकिन एम्स नई दिल्ली का एक सर्वे ऐसी हकीकत से रूबरू कराता है जो युवाओं और देश के भविष्य के लिए भी भयावह है। 10 से 75 वर्ष की उम्र के लोगों पर किए गए इस सर्वे के अनुसार करीब 14.6 फीसदी भारतीय किसी न किसी रूप में शराब के आदी हैं। इनमें भी हर पांच में एक व्यक्ति ऐसा है, जिसे तुरंत इलाज की जरूरत है। ऐसे लोगों की संख्या करीब 5.7 करोड़ है।
देश के जिन राज्यों में नशे का कारोबार सबसे ज्यादा है, उनमें पंजाब का नाम पहले पांच राज्यों में आता है। सर्वे में सामने आया कि पंजाब के अलावा छत्तीसगढ़, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और गोवा में सबसे ज्यादा लोग शराब का सेवन करते हैं। इन राज्यों में 10 फीसदी से अधिक आबादी शराब का सेवन करती है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों में नशे की आदत 17 गुना ज्यादा है। सर्वे में एक अच्छी बात सामने आई है वह यह है कि लोग नशा छोड़ना चाहते हैं।
देश में जिन नशीले पदार्थों का सेवन किया जाता है उनमें शराब, भांग, गांजा, चरस, अफीम, कोकीन, हेरोइन और विभिन्न रसायन तक शामिल हैं। सर्वे के अनुसार तकरीबन 2.8 फीसदी यानी 3.1 करोड़ लोगों ने पिछले 12 महीनों के दौरान भांग, गांजा या चरस का सेवन किया है। लगभग 72 लाख लोग इन मादक द्रव्यों का सेवन छोड़ना चाहते हैं। ज्यादातर लोग चरस और गांजा के बजाय भांग का सेवन करते हैं। इस प्रकार के मादक द्रव्यों का सेवन उत्तरप्रदेश, पंजाब, सिक्किम, छत्तीसगढ़ और दिल्ली में अधिक होता है।
हालांकि यह सर्वे पूरी तरह से नकारात्मक नहीं है। यह सर्वे इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल यह नहीं बताता कि कितने लोग नशे के आदी हैं, बल्कि इस बात की भी जानकारी देता है कि कई लोग ऐसे हैं जो हर हाल में नशे की गिरफ्त से बाहर आना चाहते हैं।
भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता खेल बाजार है। इस क्षेत्र में पंजाब देश का सिरमौर है। साल 2014 के कॉमनवेल्थ खेलों में पंजाब ने नौ पदक जीते थे। लेकिन पिछले साल ऑस्ट्रेलिया में हुए कॉमनवेल्थ खेलों में पंजाब के खिलाड़ी केवल तीन पदक ही ला पाए थे।
पंजाब के 90 फीसदी युवा सैन्य भर्ती में असफल
पंजाब ने देश की आर्थिक उन्नति के साथ-साथ हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई है। सेना की बात करें तो आजादी के वक्त सेना में 50 फीसदी अधिकारी पंजाब से ही थे। यही स्थिति वायु सेना और नौसेना का भी था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसमें परिवर्तन आया है। साल 2015-17 के दौरान पंजाब के 45 हजार से ज्यादा युवाओं ने सैन्य परीक्षा दी थी, लेकिन उनमें से 90 फीसदी शारीरिक परीक्षण में असफल रह गए थे।