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देश को अपनी गिरफ्त में ले रहा 'केमिकल टेरेरिज्म', युवाओं के साथ भविष्य पर भी खतरा

Wed, 22 May 2019 08:47 PM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : डेमो फोटो
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नशे की लत न केवल इंसान को खोखला करती है बल्कि उस समाज और देश को भी प्रभावित करती है, जहां वह रहता है। पूरी दुनिया आज जिन समस्याओं से जूझ रही है, केमिकल टेरेरिज्म उनमें प्रमुख है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2017 में पूरी दुनिया में नशे के चलते 2.6 लाख लोगों की मौत हुई थी। 

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नशे की लत से भारत भी अछूता नहीं है। यहां नशाखोरी के लिए पंजाब तो एक तरह से कुख्यात हो गया है। यहां पिछले कुछ सालों में नशाखोरी का आंकड़ा बेतहाशा बढ़ा है। आंकड़ों को देखें तो पंजाब में 9 लाख लोग ड्रग्स का सेवन करते हैं। इनमें 3.5 लाख लोग नशे के लती हैं। राज्य में नशे या इससे होने वाली बीमारी से हर महीने 112 मौत हो रही हैं। 

'ड्रग एब्यूज! प्रॉब्लम इज इंटेंस इन पंजाब' और चंडीगढ़ पीजीआई व एम्स की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में नशे के चलते कई घर उजड़ गए हैं। नशे की वजह से हुई बीमारी नपुंसकता की वजह से कई घरों में दरार आ गई। एक ही सिरिंज से ड्रग लेने से एचआईवी/एड्स, हेपेटाइटिस-सी जैसी बीमारियां फैल रही हैं। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की रिपोर्ट बताती है कि साल 2007-17 के दौरान देश में 25 हजार लोगों ने नशा न मिलने की वजह से आत्महत्या कर ली, इनमें 74 फीसदी घटनाएं केवल पंजाब में हुईं। 

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40 फीसदी भारतीय चाहते हैं नशीले पदार्थों पर लगे रोक

रिसर्च फर्म इप्सोस द्वारा किए गए एक सर्वे के अनुसार 40 फीसदी भारतीय चाहते हैं कि देश में सिगरेट, ई-सिगरेट और गांजा जैसे मादक पदार्थों पर रोक लगे। यह तथ्य इसलिए बेहद जरूरी है क्योंकि देश की 14.6 फीसदी आबादी नशे की आदी है, वहीं पंजाब हर तरह के नशे के मामले में सबसे आगे है। 

साल 2016 में आई फिल्म 'उड़ता पंजाब' पंजाब में नशे के कारोबाक पर आधारित थी। जब यह फिल्म आई थी तो काफी बवाल हुआ था। हालांकि वस्तु स्थितियों में अब काफी परिवर्तन आया है, लेकिन एम्स नई दिल्ली का एक सर्वे ऐसी हकीकत से रूबरू कराता है जो युवाओं और देश के भविष्य के लिए भी भयावह है। 10 से 75 वर्ष की उम्र के लोगों पर किए गए इस सर्वे के अनुसार करीब 14.6 फीसदी भारतीय किसी न किसी रूप में शराब के आदी हैं। इनमें भी हर पांच में एक व्यक्ति ऐसा है, जिसे तुरंत इलाज की जरूरत है। ऐसे लोगों की संख्या करीब 5.7 करोड़ है। 

नशे में पंजाब सबसे आगे

देश के जिन राज्यों में नशे का कारोबार सबसे ज्यादा है, उनमें पंजाब का नाम पहले पांच राज्यों में आता है। सर्वे में सामने आया कि पंजाब के अलावा छत्तीसगढ़, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और गोवा में सबसे ज्यादा लोग शराब का सेवन करते हैं। इन राज्यों में 10 फीसदी से अधिक आबादी शराब का सेवन करती है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों में नशे की आदत 17 गुना ज्यादा है। सर्वे में एक अच्छी बात सामने आई है वह यह है कि लोग नशा छोड़ना चाहते हैं। 

देश में जिन नशीले पदार्थों का सेवन किया जाता है उनमें शराब, भांग, गांजा, चरस, अफीम, कोकीन, हेरोइन और विभिन्न रसायन तक शामिल हैं। सर्वे के अनुसार तकरीबन 2.8 फीसदी यानी 3.1 करोड़ लोगों ने पिछले 12 महीनों के दौरान भांग, गांजा या चरस का सेवन किया है। लगभग 72 लाख लोग इन मादक द्रव्यों का सेवन छोड़ना चाहते हैं। ज्यादातर लोग चरस और गांजा के बजाय भांग का सेवन करते हैं। इस प्रकार के मादक द्रव्यों का सेवन उत्तरप्रदेश, पंजाब, सिक्किम, छत्तीसगढ़ और दिल्ली में अधिक होता है। 

हालांकि यह सर्वे पूरी तरह से नकारात्मक नहीं है। यह सर्वे इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल यह नहीं बताता कि कितने लोग नशे के आदी हैं, बल्कि इस बात की भी जानकारी देता है कि कई लोग ऐसे हैं जो हर हाल में नशे की गिरफ्त से बाहर आना चाहते हैं। 
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खेलों पर भी पड़ रहा केमिकल टेरेरिज्म का असर

भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता खेल बाजार है। इस क्षेत्र में पंजाब देश का सिरमौर है। साल 2014 के कॉमनवेल्थ खेलों में पंजाब ने नौ पदक जीते थे। लेकिन पिछले साल ऑस्ट्रेलिया में हुए कॉमनवेल्थ खेलों में पंजाब के खिलाड़ी केवल तीन पदक ही ला पाए थे। 

पंजाब के 90 फीसदी युवा सैन्य भर्ती में असफल 

पंजाब ने देश की आर्थिक उन्नति के साथ-साथ हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई है। सेना की बात करें तो आजादी के वक्त सेना में 50 फीसदी अधिकारी पंजाब से ही थे। यही स्थिति वायु सेना और नौसेना का भी था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसमें परिवर्तन आया है। साल 2015-17 के दौरान पंजाब के 45 हजार से ज्यादा युवाओं ने सैन्य परीक्षा दी थी, लेकिन उनमें से 90 फीसदी शारीरिक परीक्षण में असफल रह गए थे।
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