फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चिंताजनक: धूप में माइक्रोप्लास्टिक से फैल रहा अदृश्य रासायनिक प्रदूषण, पानी में घुलता जहर पारिस्थितिकी तंत्र

Sun, 04 Jan 2026 07:10 AM IST
शुभम कुमार अमर उजाला नेटवर्क

सार

नदियों, झीलों और समुद्रों में तैरता माइक्रोप्लास्टिक अब केवल दिखाई देने वाला कचरा नहीं है, बल्कि धूप के संपर्क में आने पर यह रासायनिक प्रदूषण फैलाता है। शोध से पता चला कि प्लास्टिक नदियों में घुलनशील जैविक पदार्थ छोड़ते हैं, जो प्राकृतिक पदार्थों से अलग हैं। यह अदृश्य रसायन जलीय जीवन और मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।

विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

नदियों, झीलों और समुद्रों में तैरता माइक्रोप्लास्टिक अब केवल दिखाई देने वाला कचरा नहीं बल्कि धूप के असर से रासायनिक प्रदूषण बनता जा रहा है। ऐसा प्रदूषण जो पारिस्थितिकी तंत्र, जलीय जीवों और अंततः मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। शोधकर्ताओं ने चेताया है कि माइक्रोप्लास्टिक के इस रसायन छोड़ने वाले व्यवहार को समझे बिना जल प्रदूषण की समस्या को पूरी तरह नहीं सुलझाया जा सकता। अध्ययन के मुताबिक माइक्रोप्लास्टिक सिर्फ भौतिक प्रदूषण नहीं फैलाते, बल्कि पानी में घुलनशील जैविक पदार्थों का एक जटिल मिश्रण लगातार छोड़ते रहते हैं।

विज्ञापन


जैसे ही ये कण धूप, विशेषकर पराबैंगनी किरणों के संपर्क में आते हैं, इनसे रसायनों का रिसाव कई गुना तेज हो जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह प्रक्रिया नदियों और समुद्रों में एक अदृश्य रासायनिक बादल बनाती है, जिसे आम तौर पर मापा या देखा नहीं जा सकता। यह शोध जर्नल न्यू कंटैमिनेंट्स में प्रकाशित हुआ है, जिसमें पहली बार विस्तार से बताया गया है कि माइक्रोप्लास्टिक से निकलने वाले घुलनशील जैविक पदार्थ प्राकृतिक जल स्रोतों में कैसे बनते हैं और समय के साथ उनकी संरचना कैसे बदलती है।

शोध में कौन सी बातें आई सामने?
शोध से स्पष्ट हुआ कि ये रसायन नदियों या मिट्टी में प्राकृतिक रूप से बनने वाले जैविक पदार्थों से बिल्कुल अलग होते हैं, यानी इन्हें प्रकृति का सामान्य हिस्सा नहीं माना जा सकता। शोधकर्ताओं ने चार आम किस्म के प्लास्टिक पॉलीएथिलीन, पॉलीएथिलीन टेरेफ्थेलेट (पीईटी), पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए) और पॉलीब्यूटिलीन एडिपेट को-टेरेफ्थेलेट (पीबीएटी) का अध्ययन किया। उन्नत तकनीकों जैसे फ्लोरेसेंस स्पेक्ट्रोस्कोपी, हाई-रिजॉल्यूशन मास स्पेक्ट्रोमेट्री और इंफ्रारेड विश्लेषण से पता चला कि हर प्लास्टिक पानी में अपनी अलग रासायनिक छाप छोड़ता है।
विज्ञापन


जलीय जीवन व इन्सान पर असर
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बदलता हुआ रासायनिक मिश्रण जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को कई स्तरों पर प्रभावित कर सकता है। सूक्ष्म और आसानी से घुलने वाले अणु सूक्ष्मजीवों की गतिविधि को बढ़ा या दबा सकते हैं, पोषक तत्वों के चक्र को बिगाड़ सकते हैं और धातुओं व अन्य प्रदूषकों के साथ मिलकर असर को और खतरनाक बना सकते हैं। पहले के अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि ऐसे रसायन रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज पैदा कर सकते हैं और पानी को शुद्ध करने की प्राकृतिक   व तकनीकी प्रक्रियाओं को जटिल बना देते हैं।

वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी
नॉर्थईस्ट नॉर्मल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता जिउनियन गुआन के मुताबिक माइक्रोप्लास्टिक पानी में एक ऐसा अदृश्य रासायनिक बादल बनाते हैं जो समय और मौसम के साथ बदलता रहता है और इसमें धूप की भूमिका सबसे अहम है। वहीं शोधकर्ता शिटिंग लियू ने जोर देकर कहा कि माइक्रोप्लास्टिक के पूरे जीवनचक्र को समझना जरूरी है, खासतौर पर उन अदृश्य रसायनों को जो ये पानी में छोड़ते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें