कूनो नेशनल पार्क में जन्मी मादा चीता मुखी अब ढाई साल की हो गई है। जन्म के दो महीने बाद ही उसने अपने तीन भाई-बहनों को खो दिया और मां ने भी उसे नहीं अपनाया। लेकिन चुनौतियों से जूझते हुए मुखी ने जीवन की जंग जीत ली। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने उसे साहस और सफलता की प्रतीक बताया।
मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) में 29 मार्च 2023 को नामीबियाई चीता ज्वाला से पैदा हुई मादा शावक मुखी सोमवार को वयस्क हो गई। वह 915 दिन या 30 महीने की होगी। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने मुखी को सफलता व साहस की प्रतीक बताया। भूपेंद्र ने सोमवार को सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि देश में पैदा होने वाली पहली मादा चीता मुखी अब ढाई साल की हो गई है, लेकिन जिंदगी की शुरुआत में ही उसे बड़ी त्रासदी का सामना करना पड़ा। जब वह महज दो महीने की ही थी तो भीषण गर्मी के चलते उसके तीन भाई-बहनों ने दम तोड़ दिया। ठीक इसी दिन मुखी भी कमजोर और थकी हुई मिली और उसे स्वास्थ्य जांच के लिए ले जाना पड़ा।