फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Che Guevara Birthday: आज भी लोगों के दिलों में बसे हैं ग्वेरा, जेएनयू की दीवारों पर हैं तस्वीरें

Sun, 14 Jun 2020 02:53 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
चे ग्वारा बर्थडे (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media
विज्ञापन

आज चे ग्वेरा का 88वां जन्मदिन है। वे आज बेशक इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन अपने विचारों की वजह से दुनिया के हर उस इंसान में बसे हुए हैं जो इस बाजारवाद के खिलाफ लड़ाई में खड़ा हुआ है। लंदन में पढ़ने वाले छात्र हों या क्यूबा के बच्चे, उनके मुंह पर चे ग्वेरा का नाम है। 

विज्ञापन

केवल इतना ही नहीं दिल्ली स्थित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की दीवारों और वहां के छात्रों के विचारों से लेकर हर गली-मोहल्ले की दीवारों पर चे की तस्वीर दिखाई देती है जिसमें वह सिर पर टोपी पहने अपनी आंखों से लोगों को बिना बोले बहुत कुछ समझाना चाहते हैं।


चे आम आदमी होते हुए भी गरीबों के लिए किसी मसीहा से कम नहीं थे। दुनिया के बहुत से देशों में उन्हें भगवान की तरह पूजा जाता है। उनके बारे में जितना भी लिखा जाए कम है लेकिन आज उनका जन्मदिन है और इस खास मौके पर हम आपको बताते हैं कि आखिर क्यों पूरी दुनिया में इस महान क्रांतिकारी के विचार लोगों के शरीर में खून की तरह दौड़ते हैं।
विज्ञापन


केवल 39 साल की उम्र में चे को मार दिया गया था। हालांकि उनकी मौत के इतने सालों बाद भी कोई उनके विचारों को नहीं मार पाया है। आज भी लोगों के दिलों में उनके विचार बसते हैं। चे ने मरने से पहले कहा था कि तुम एक इंसान को मार रहे हो, लेकिन उसके विचारों को नहीं मार सकते। 

भारत में जिस तरह से भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद सहित दूसरे क्रांतिकारियों को माना जाता है। ठीक इसी तरह लैटिन अमेरिका, क्यूबा सहित दुनिया के कई देशों में चे किसी हीरो से कम नहीं हैं। उनके विचारों ने लोगों की जिंदगी को बदल दिया है। भारत में भी कई ऐसे लोग हैं जो उनके विचारों से प्रेरित हैं या उनकी तरह बनना चाहता हैं। 

जेएनयू की दीवारों से लेकर वहां के प्रोफेसर और छात्रों तक आपको चे के विचारों पर बात करते हुए या उन्हें फॉलो करते हुए दिख जाएंगे। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी चीज से लगाया जा सकता है किसी भी देश का छात्र उनके विचारों को पढ़ता है और उन्हें फॉलो करता है। चे चाहते तो अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स के कॉलेज में डॉक्टर बनने के बाद अपनी जिंदगी आराम से बिता सकते थे लेकिन उन्होंने क्रांति के रास्ते को चुना।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें