आज चे ग्वेरा का 88वां जन्मदिन है। वे आज बेशक इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन अपने विचारों की वजह से दुनिया के हर उस इंसान में बसे हुए हैं जो इस बाजारवाद के खिलाफ लड़ाई में खड़ा हुआ है। लंदन में पढ़ने वाले छात्र हों या क्यूबा के बच्चे, उनके मुंह पर चे ग्वेरा का नाम है।
केवल इतना ही नहीं दिल्ली स्थित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की दीवारों और वहां के छात्रों के विचारों से लेकर हर गली-मोहल्ले की दीवारों पर चे की तस्वीर दिखाई देती है जिसमें वह सिर पर टोपी पहने अपनी आंखों से लोगों को बिना बोले बहुत कुछ समझाना चाहते हैं।
चे आम आदमी होते हुए भी गरीबों के लिए किसी मसीहा से कम नहीं थे। दुनिया के बहुत से देशों में उन्हें भगवान की तरह पूजा जाता है। उनके बारे में जितना भी लिखा जाए कम है लेकिन आज उनका जन्मदिन है और इस खास मौके पर हम आपको बताते हैं कि आखिर क्यों पूरी दुनिया में इस महान क्रांतिकारी के विचार लोगों के शरीर में खून की तरह दौड़ते हैं।
केवल 39 साल की उम्र में चे को मार दिया गया था। हालांकि उनकी मौत के इतने सालों बाद भी कोई उनके विचारों को नहीं मार पाया है। आज भी लोगों के दिलों में उनके विचार बसते हैं। चे ने मरने से पहले कहा था कि तुम एक इंसान को मार रहे हो, लेकिन उसके विचारों को नहीं मार सकते।
भारत में जिस तरह से भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद सहित दूसरे क्रांतिकारियों को माना जाता है। ठीक इसी तरह लैटिन अमेरिका, क्यूबा सहित दुनिया के कई देशों में चे किसी हीरो से कम नहीं हैं। उनके विचारों ने लोगों की जिंदगी को बदल दिया है। भारत में भी कई ऐसे लोग हैं जो उनके विचारों से प्रेरित हैं या उनकी तरह बनना चाहता हैं।
जेएनयू की दीवारों से लेकर वहां के प्रोफेसर और छात्रों तक आपको चे के विचारों पर बात करते हुए या उन्हें फॉलो करते हुए दिख जाएंगे। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी चीज से लगाया जा सकता है किसी भी देश का छात्र उनके विचारों को पढ़ता है और उन्हें फॉलो करता है। चे चाहते तो अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स के कॉलेज में डॉक्टर बनने के बाद अपनी जिंदगी आराम से बिता सकते थे लेकिन उन्होंने क्रांति के रास्ते को चुना।