राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 19-20 मार्च को बंगलूरू में होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में सरकार्यवाह सहित शीर्ष पदों पर नई नियुक्तियां करने पर विचार हो सकता है। मौजूदा सरकार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी अस्वस्थता के कारण अपना पद छोड़ने की पेशकश कर चुके हैं।
संघ की शीर्ष संस्था अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा को इस पर फैसला लेना है यदि भैयाजी का अनुरोध स्वीकार कर लेती है तो चार महा सहसरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, भागैया जी, मुकुंदा जी और डॉक्टर कृष्ण गोपाल में से किसी को भी सरकार्यवाह चुना जा सकता है।
भैयाजी जोशी ने अस्वस्थता के कारण जताई सरकार्यवाह पद छोड़ने की इच्छा
पिछले 12 वर्षों से सरकार्यवाह पद की जिम्मेदारी निभा रहे भैयाजी ने 2018 में ही पद छोड़ने की इच्छा जाहिर की थी। लेकिन तब प्रतिनिधि सभा ने उनसे फिलहाल पद पर बने रहने को कहा था। अब 75 वर्ष से अधिक आयु होने और अस्वस्थता की वजह से उन्होंने पद छोड़ने की इच्छा जताई है।
संघ से जुड़े हुए उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, चारों सहसरकार्यवाह में से होसबोले का दावा सबसे प्रबल माना जा रहा है। हालांकि वे संघ के मूल सदस्य नहीं थे बल्कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जरिए संघ में आए थे। उनके अलावा संघ में पहली बार दलित नेतृत्व वर्णन उभारने के उद्देश्य से भागैया जी को भी सरकार्यवाह चुना जा सकता है।
तीन वर्ष का कार्यकाल
आरएसएस में सरसंघचालक के बाद सबसे महत्वपूर्ण पद सरकार्यवाह का होता है जिन्हें तीन वर्ष के लिए चुना जाता है। चुनाव 1500 सदस्यों वाली प्रतिनिधि सभा में होता है। इस वर्ष कोरोना वायरस की वजह से 500 सदस्य ही भाग लेंगे।