जीएसटी के तहत कुछ वस्तुओं पर कर की दरें कम करने, साल में डेढ़ करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाले छोटे कारोबारियों को मासिक रिटर्न से छुटकारा मिलने तथा सर्राफा कारोबारियों को 50 हजार रुपये से ऊपर की खरीद पर कागजी कार्रवाई से राहत देने से बाजार में उत्साह का माहौल है। इन सबके बावजूद सर्राफा तथा अपेरल क्षेत्र के कारोबारी उछाल को लेकर आशंकित हैं।
छोटे कारोबारी: खुशी का माहौल
कंपोजिशन योजना की सीमा एक करोड़ रुपये करने तथा डेढ़ करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वालों को मासिक के बजाय तिमाही रिटर्न दाखिल करने की सुविधा देने से छोटे कारोबारियों में खुशी का माहौल है।
इंडिया मार्ट के संस्थापक एवं सीईओ दिनेश अग्रवाल ने कहा कि ऐसे कारोबारियों की संख्या 90 फीसदी से ज्यादा हैं। मासिक रिटर्न और टैक्स जमा करने के झंझट से मुक्ति मिलेगी, तो वे अपने धंधे पर ज्यादा ध्यान देंगे जिससे उनका कारोबार बढ़ेगा।
कपड़ा बाजार: चार माह बाद दिखेगा असर
अपेरल एक्सपोर्ट प्रोमोशन काउंसिल (एईपीसी) के उपाध्यक्ष एचकेएल मागू ने कृत्रिम धागों पर जीएसटी की दर 18 से घटा कर 12 फीसदी करने के फैसले का स्वागत किया, लेकिन आशंका जताई कि कपड़ा बनाने वाले कीमत में छह फीसदी कटौती करेंगे भी या नहीं।
यदि कपड़ा निर्माता कीमत कम करेंगे तो उनकी इनपुट लागत छह फीसदी कम होगी, लेकिन इसका असर दिखने में कम से कम तीन से चार महीने लगेंगे। जीएसटी के बाद से परिधान निर्यात घटा है। अनुमान है कि इस क्षेत्र में 8-10 फीसदी की गिरावट आई है।