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Chandrayaan-3: प्रक्षेपण के लिए अंतरिक्ष यान को रॉकेट के साथ जोड़ा गया, 13 से 19 जुलाई के बीच किया जाएगा लॉन्च

Wed, 05 Jul 2023 05:53 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, बेंगलुरु।

सार

बेंगलुरु मुख्यालय स्थित राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने ट्वीट कर बताया कि आज श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में चंद्रयान-3 युक्त एनकैप्सुलेटेड असेंबली को एलवीएम3 के साथ जोड़ा गया है।
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Chandrayaan-3 - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बुधवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में अपने नए प्रक्षेपण रॉकेट एलवीएम3 (LVM3) के साथ चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान युक्त एनकैप्सुलेटेड असेंबली को जोड़ दिया। चंद्रयान-3 चंद्रयान-2 का अनुवर्ती मिशन है, जो चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित रूप से उपकरण उतारने और उससे अन्वेषण गतिविधियां कराने की संपूर्ण क्षमता प्रदर्शित करता है।

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बेंगलुरु मुख्यालय स्थित राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी ने ट्वीट कर बताया कि आज श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में चंद्रयान-3 युक्त एनकैप्सुलेटेड असेंबली को एलवीएम3 के साथ जोड़ा गया। इसरो ने कहा है कि चंद्रयान-3 मिशन 13 जुलाई से 19 जुलाई के बीच प्रक्षेपित किया जाएगा। इसरो के एक अधिकारी ने कहा, हमारा लक्ष्य इसे 13 जुलाई को प्रक्षेपित करने का है।

चंद्रयान-3 मिशन के तहत चंद्रमा के चट्टानों की ऊपरी परत की थर्मोफिजिकल विशेषताएं, चंद्रमा पर भूकंप आने की बारंबारता, चंद्रमा की सतह पर प्लाज्मा वातावरण और उपकरण उतारे जाने वाले स्थान के निकट तत्वों की संरचना का अध्ययन करने वाले उपकरण भेजे जाएंगे। इसरो अधिकारियों के अनुसार, लैंडर और रोवर पर लगे इन वैज्ञानिक उपकरणों को ‘चंद्रमा का विज्ञान’ विषय में रखा जाएगा, जबकि प्रायोगिक उपकरण चंद्रमा की कक्षा से पृथ्वी का अध्ययन करेंगे, जिन्हें ‘चंद्रमा से विज्ञान’ विषय में रखा जाएगा। 
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इसरो के अंतरिक्ष विज्ञान कार्यक्रम कार्यालय की पूर्व निदेशक डॉ सीता ने बताया कि चंद्रयान-तीन में एक प्रणोदन मॉड्यूल होगा, जो लैंडर और एक रोवर को लेकर जाएगा और यह उन्हें चंद्रमा की कक्षा तक पहुंचने में सक्षम बनाएगा।

उन्होंने बताया, अनुमान है कि चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्र की नर्म सतह पर लैंडर उतरेगा, उससे रोवर बाहर आएगा और चंद्रमा की सतह पर घूमना शुरू करेगा। हमारी अपेक्षा है कि यह चंद्रमा की सतह के गुणों का अवलोकन करे। लैंडर के साथ कुछ ‘पेलोड’ भी जाएंगे और वह भी विभिन्न प्रयोग सतह पर करेंगे तथा जांच करेंगे।

डॉ. सीता के अनुसार, प्रयोग एक चंद्र दिवस के दौरान किए जाएंगे यानी इनमें पृथ्वी के करीब 30 दिन लगेंगे। उन्होंने कहा, करीब 15 दिन बाद रात होगी और तापमान शून्य से 170 डिग्री सेंटीग्रेड या इससे कम हो जाएगा। अगले 15 दिन में स्थिति बदलेगी। हम कह नहीं सकते कि ठंड का लैंडर पर कितना और क्या असर होगा। लेकिन, शुरुआती 15 दिन बेहद अहम होंगे।

इस साल मार्च में चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान ने आवश्यक परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा किया था, इस दौरान अंतरिक्ष यान के प्रक्षेपण के दौरान कठोर कंपन और ध्वनिक वातावरण का सामना करने की क्षमता की पुष्टि हुई थी। ये परीक्षण विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण थे, इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान, जिसे एलवीएम3 (लॉन्च व्हीकल मार्क-III) (जिसे पहले GSLV Mk III कहा जाता था) द्वारा लॉन्च किया जाएगा, यह तीन मॉड्यूल - प्रोपल्शन, लैंडर और रोवर का एक संयोजन है।
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लैंडर, चंद्रमा के एक विशेष स्थान पर सहजता से उतरने की क्षमता से लैस होगा और रोवर को तैनात करेगा, जो चंद्रमा की सतह पर रासायनिक विश्लेषण करेगा।
 

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