चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर में लगे चास्टे उपकरण ने चंद्रमा के तापमान से जुड़ी पहली जानकारी भेजी है। इसके अनुसार चंद्रमा पर अलग-अलग गहराई पर तापमान में काफी अंतर है। चंद्र सतह जहां करीब 50 डिग्री सेल्सियस जितनी गर्म है, वहीं सतह से महज 80 मिमी नीचे जाने पर तापमान माइनस 10 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। चंद्रमा की सतह एक ऊष्मारोधी दीवार जैसी है, जो सूर्य के भीषण ताप के असर को सतह के भीतर पहुंचने से रोकने की क्षमता रखती है। कुछ विशेषज्ञों का दावा है कि यह एक संकेत भी है कि चंद्र सतह के नीचे पानी के भंडार हो सकते हैं। इसरो ने रविवार को इस नई जानकारी के बारे में लिखा, विक्रम लैंडर ने चंद्र सरफेस थर्मो फिजिकल एक्सपेरिमेंट यानी चास्टे उपकरण ने दक्षिणी ध्रुव के निकट चंद्रमा की ऊपरी परत के तापमान की प्रोफाइल बनाई है। इसके जरिये चंद्रमा की सतह के तापीय व्यवहार को समझने में मदद मिल सकती है।
विक्रम लैंडर पर लगे ChaSTE पेलोड से हमें क्या पता चला
विक्रम लैंडर पर लगा ChaSTE दक्षिणी ध्रुव के आसपास चंद्रमा की ऊपरी मिट्टी के तापमान को मापता है। इसकी मदद से चंद्रमा की सतह के तापीय गणित को समझा जा सकेगा। ChaSTE पेलोड तापमान जांचने का एक यंत्र है, जो एक नियंत्रित प्रवेश तंत्र की मदद से 10 सेमी की गहराई तक पहुंच सकता है। पेलोड में 10 अलग-अलग तापमान सेंसर लगे हैं। इसरो ने जो ग्राफ शेयर किया है, वह अलग-अलग गहराइयों पर दर्ज किए गए चांद की सतह या निकट सतह के तापमान में अंतर को दर्शाता है। यह चांद के दक्षिणी ध्रुव पर की गई पहली जांच है। भारत ऐसा करने वाला पहला देश बन गया है।
इसरो ने कहा कि ‘ChaSTE’ पेलोड को भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) अहमदाबाद के सहयोग से इसरो के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) की अंतरिक्ष भौतिकी प्रयोगशाला (एसपीएल) के नेतृत्व वाली एक टीम द्वारा विकसित किया गया था।