भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के मिशन चंद्रयान-2 ने चंद्रमा पर बने विशालकाय गड्ढे की तस्वीरें ली हैं। इस गड्ढे (क्रेटर) का नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने बयान जारी कर कहा, 12 अगस्त को साराभाई की जन्मशती थी, चांद पर बने गड्ढे का नामकरण उनके नाम पर करके उन्हें श्रद्धांजलि दी गई है।
चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर द्वारा विक्रम साराभाई क्रेटर की थ्रीडी तस्वीर ली गई है। इसके मुताबिक, साराभाई क्रेटर तकरीबन 250 से 300 किमी के दायरे तक फैला है। यहां पर अमेरिका के चंद्र मिशन अपोलो 17 और रूस के चंद्र मिशन लूना 21 उतर चुके हैं। इस क्रेटर की गहराई तकरीबन 1.7 किमी है।
चंद्रयान-2 की इन तस्वीरों की मदद से चंद्रमा के क्षेत्र के बारे में यह पता लगाया जा सकेगा कि वहां पर ज्वालामुखी फूटने के बाद लावा भरने की प्रक्रिया क्या रही थी। चंद्रयान-2 लगातार महत्वपूर्ण वैज्ञानिक आंकडे़ मुहैया करा रहा है। पूरी दुनिया के लिए ये आंकडे़ अक्तूबर, 2020 से जारी किए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतारने के लिए चंद्रयान-2 बीते साल 22 जुलाई को लॉन्च किया गया था। हालांकि, सात सितंबर को इसके लैंडर विक्रम की हार्ड लैंडिंग हो गई थी, जिससे भारत की चांद की सतह पर उतरने की कोशिश कामयाब नहीं हो पाई थी। हालांकि, मिशन का ऑर्बिटर अपने मकसद में कामयाब रहा था और वह कम से कम सात साल तक चंद्रमा के बारे में जानकारी देता रहेगा।