बंगलूरू। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर ‘विक्रम’ मॉड्यूल की सॉफ्ट लैंडिंग के इंतजार के बीच दिग्गज वैज्ञानिक एम अन्नादुरै ने चंद्रयान-1 की लॉन्चिंग के आखिरी लम्हों की यादें ताजा की हैं। अन्नादुरै का कहना है कि 2008 में भारत के पहले चंद्रयान मिशन की लॉन्चिंग का दिन काफी तनाव भरा था। उस दिन इसरो ने काफी मुश्किल हालात का सामना किया। हमारे पास लॉन्चिंग के लिए बेहद कम समय था और मौसम बहुत ही खराब था।
मिशन के प्रोजेक्ट निदेशक रहे अन्नादुरै के मुताबिक, अंतिम दिन हमें न सिर्फ कुछ तकनीकी खामियों को ठीक करना था बल्कि श्रीहरिकोटा प्रक्षेपण केंद्र पर खराब मौसम से भी जूझना था। इसरो में हर कोई घबराया हुआ था लेकिन तभी सौभाग्य से आधे घंटे के लिए मौसम साफ हो गया और लॉन्चिंग को अंजाम दिया गया। हालांकि, इसके बाद फिर तूफान और बारिश शुरू हो गई थी।
अन्नादुरै का मानना है कि मौजूदा चंद्रयान-2 मिशन भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान के सफर में एक और मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा, एक दशक पहले जो कार्य शुरू हुआ, उसे आगे बढ़ाया गया। यह काफी संतुष्टिदायक है। उनका मानना है कि चंद्रयान-1, चंद्रयान-2 और मंगलयान ने भारत का कद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया है।