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चंद्रयान-2: लैंडिंग से पहले धड़कनें तेज, प्रार्थना का माहौल, इधर अन्नादुरै ने याद दिलाया मिशन 2008

Fri, 06 Sep 2019 03:40 AM IST
Nilesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला
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chandrayan -2 - फोटो : ISRO
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जैसे-जैसे चंद्रयान-2 चांद की सतह के करीब पहुंच रहा है, वैसे-वैसे सभी की धड़कने तेज होने लगी हैं। देशभर में लोग इस वक्त विक्रम मॉड्यूल की सफल ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ का इंतजार कर रहे हैं। शनिवार के शुरुआती घंटों में होने वाली इस लैंडिंग को लेकर इसरों के वैज्ञानिक भी इन दिनों प्रार्थना के मूड में हैं। वहीं दूसरी ओर दिग्गज वैज्ञानिक एम.अन्नादुरै का कहना है कि 2008 में भारत के पहले चंद्रयान मिशन की लॉन्चिंग का दिन भी काफी तनावभरा था। 

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इसरो में मिशन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, अब हर किसी का ध्यान लैंडर (विक्रम) में होने वाली गतिविधि पर टिका है। लिहाजा, मैं यही कहूंगा कि सफल सॉफ्ट-लैंडिंग के लिए सभी प्रार्थना करें। हाल ही में इसरो अध्यक्ष के सिवन ने कहा था कि अंतरिक्ष एजेंसी ने मिशन की सफलता के लिए मानवीय रूप से हर संभव प्रयास किया है। शीर्ष अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने भी सफलता को लेकर भरोसा जाहिर किया था। इस बीच अन्य दिग्गज वैज्ञानिक भी चंद्रयान-2 की लैंडिंग को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं। 

चंद्रयान -1 मिशन का नेतृत्व कर चुके इसरो के पूर्व अध्यक्ष जी माधवन नायर ने कहा, यह एक अदभुत घटना (सॉफ्ट-लैंडिंग) होगी। हम सब इसका इंतजार कर रहे हैं। मुझे यकीन है कि यह मिशन 100 फीसदी सफल होगा। वहीं, इसरो के एक अन्य पूर्व अध्यक्ष एएस किरण कुमार ने सॉफ्ट-लैंडिंग को बहुत ही महत्वपूर्ण प्रक्रिया बताया।

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कुमार ने कहा, अब तक जो कुछ भी हुआ, उसकी तुलना में अब हम सबसे अहम चरण में प्रवेश कर रहे हैं। अब तक सब कुछ योजना के मुताबिक रहा है। लिहाजा, उम्मीद है कि आगे भी योजना सफल रहेगी। चंद्रयान -1 के परियोजना निदेशक रहे ए एन्नादुरै ने चंद्रयान-2 की सॉफ्ट लैंडिंग की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा, इसरो को 40 से अधिक जीईओ (जियोसिंक्रोनस इक्वेटोरियल ऑर्बिट) मिशन का अनुभव है। 

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चंद्रयान-1 की लॉन्चिंग पर इसरो ने झेला था काफी तनाव : अन्नादुरै  

बंगलूरू।  चांद के दक्षिणी ध्रुव पर ‘विक्रम’ मॉड्यूल की सॉफ्ट लैंडिंग के इंतजार के बीच दिग्गज वैज्ञानिक एम अन्नादुरै ने चंद्रयान-1 की लॉन्चिंग के आखिरी लम्हों की यादें ताजा की हैं। अन्नादुरै का कहना है कि 2008 में भारत के पहले चंद्रयान मिशन की लॉन्चिंग का दिन काफी तनाव भरा था। उस दिन इसरो ने काफी मुश्किल हालात का सामना किया। हमारे पास लॉन्चिंग के लिए बेहद कम समय था और मौसम बहुत ही खराब था।

मिशन के प्रोजेक्ट निदेशक रहे अन्नादुरै के मुताबिक, अंतिम दिन हमें न सिर्फ कुछ तकनीकी खामियों को ठीक करना था बल्कि श्रीहरिकोटा प्रक्षेपण केंद्र पर खराब मौसम से भी जूझना था। इसरो में हर कोई घबराया हुआ था लेकिन तभी सौभाग्य से आधे घंटे के लिए मौसम साफ हो गया और लॉन्चिंग को अंजाम दिया गया। हालांकि, इसके बाद फिर तूफान और बारिश शुरू हो गई थी।

अन्नादुरै का मानना है कि मौजूदा चंद्रयान-2 मिशन भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान के सफर में एक और मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा, एक दशक पहले जो कार्य शुरू हुआ, उसे आगे बढ़ाया गया। यह काफी संतुष्टिदायक है। उनका मानना है कि चंद्रयान-1, चंद्रयान-2 और मंगलयान ने भारत का कद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया है।
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