भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने ही वाला था कि अचानक केवल 2.1 किलोमीटर दूर चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम से इसरो का संपर्क टूट गया। जिसके बाद कंट्रोल रूम में मायूसी छा गई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसरो मुख्यालय में मौजूद थे। सन्नाटे के बीच बाहर निकल चुके प्रधानमंत्री दोबारा कंट्रोल रूम में दाखिल हुए और वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाया। उन्होंने वैज्ञानिकों को हिम्मत देते हुए कहा कि अबतक आपने जो किया, वह कम बड़ी उपलब्धि नहीं है।
इसरो अध्यक्ष प्रधानमंत्री मोदी को उनकी गाड़ी तक छोड़ने के लिए पहुंचे। इस दौरान वह खुद को संभाल नहीं पाए और भावुक हो गए। जिसके बाद प्रधानमंत्री ने गले लगाकर उनकी पीठ थपथपाई। फिर प्रधानमंत्री गाड़ी में बैठे और के सिवन ने हाथ हिलाकर उन्हें अलविदा कहा। इसी बीच सिवन की आंसुओं से भरी आंखें और चेहरे पर निराशा का भाव साफ दिखाई दे रहा था। खुद प्रधानमंत्री भी थोड़े भावुक दिखाई दिए।
मोदी ने इसरो केंद्र में दिए अपने संबोधन में वैज्ञानिकों से चंद्र मिशन में बाधाओं से दिल छोटा न करने के लिए कहा और कहा कि एक नई सुबह जरूर होगी। जैसे ही प्रधानमंत्री ने अपना भाषण पूरा किया तो सिवन उन्हें छोड़ने के लिए साथ आए। जब प्रधानमंत्री अपनी कार में बैठने जा रहे थे तो उन्होंने सिवन को आत्मीयता से गले लगाते हुए उन्हें दिलासा दिया। सिवन उस वक्त रो पड़े।