चंद्रयान-1 मिशन के एक दशक से भी अधिक समय बाद अब भारत अपने दूसरे मिशन के लिए पूरी तरह तैयार है। चंद्रयान-2 मिशन के लॉन्च होने के लिए अब काउंटडाउन शुरू हो चुका है। भारत का दूसरा अंतरिक्ष मिशन चंद्रयान-2, 15 जुलाई की अलसुबह 2.51 बजे (14 और 15 जुलाई के बीच का समय ) लॉन्च किया जाएगा। इस मिशन से चांद के बारे में काफी जानकारी मिलेगी। मिशन के लिए GSLV MK-III का इस्तेमाल किया जाएगा।
अतंरराष्ट्रीय अंतरिक्ष रेस में शामिल होने के लिए ये भारत का बड़ा कदम है। जिससे वह अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों से अब कंधे से कंधा मिलाएगा। इसी साल मार्च में भी भारत अंतरिक्ष में निचली कक्षा में लाइव सैटेलाइट को मार गिराने की क्षमता रखने वाला चौथा देश बन गया है। इससे पहले यह क्षमता अमेरिका, रूस और चीन के ही पास थी। ये लाइव सैटेसाइट जो कि एक पूर्व निर्धारित लक्ष्य था, उसे एंटी सैटेलाइट मिसाइल (A-SAT) द्वारा मारा गया था।
चंद्रयान-2 के जरिए इसरो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर जाएगा जहां आज तक कोई नहीं पहुंच पाया है। इस जोखिम से वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय को लाभ होगा। चंद्रयान छह या सात सितंबर को चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव के पास लैंड करेगा। ऐसा होते ही भारत चांद की सतह पर लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन जाएगा। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर अब तक कोई भी देश नहीं जा सका है लेकिन अब यहां भारत अपने चंद्रयान- 2 को उतारकर इतिहास रचने जा रहा है। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सूर्य की किरणें सीधी नहीं बल्कि तिरछी पड़ती हैं। इसलिए, यहां का तापमान बहुत कम होता है।
978 करोड़ रुपये के इस मिशन में GSLV Mk-III चंद्रयान-2 को उसकी निर्धारित कक्षा तक लेकर जाएगा। ये तीन स्टेज वेहिकल भारत का सबसे ताकतवर लॉन्चर है। चंद्रयान-1 के विपरीत चंद्रयान-2 सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। यहां वह अपने छह पहिया रोवर प्रगयान को उतारेगा। वह चांद पर काफी सारे प्रयोग करेगा।